मुख्यपृष्ठस्तंभमैथिली व्यंग्य : पर्यावरण मंत्री आ ग्लोबल वार्मिंग!

मैथिली व्यंग्य : पर्यावरण मंत्री आ ग्लोबल वार्मिंग!

डॉ. ममता शशि झा
मुंबई
पर्यावरण मंत्री प्रताप सिंह के पत्नी रागिनी के नबका बंगला जंगल के बीचोबीच चाहई छलनि, जाहिमे गाछी, आ बड़कीटा पोखरि हेबाक चाही। अपन मोनक बात पतिदेव स कहलखिन। मंत्री महोदय अपना पत्नी के समय छोड़ी कऽ सब किछु देब लेल तैयार छलखिन।
सोचलनि ‘चलु किछु नबका काज दिस मोन लागल रहतनि ते मोन ओहि दिस लागल रहतनि त हम चैन सँ रहब, नहिं तँ फेर व्येह राग अलाप लगती जे हमरा समय नहिं दई छी। ओहुना ग्लोबल वार्मिंग पर चर्चा करबाक नाम पर हुनका पाँचटा देशमे जेबाक कार्यक्रम निर्धारित भे रहल छलनि आ जाए में वह पत्नी के संगे नहीं जाए चाहे छलाह, हुनकर आजादी मे बाधा जे भे जाए छलनि! देसरा देश के लोकसबहक संगे समय बिता के अपन आ देश के संबंध मजबूत बनाब चाहई छलाह। अहि काजमे मोन लागल रहतनि त संगे जेबाक जिद नहिं करति से सोचि के सेक्रेटरी के बजाक सब बात बुझा देलखिन।
सेक्रेटरी महोदय, ‘मुदा सरकार अहाँत’ बड़काटाके घर एखने गाम मे बनेलहुहें आरो विदेश मे अनेको मकान अछि, एकटा आर बंगला सेहो जंगलक बीच में?’ मंत्री महोदय, ‘हँ श्रीमती जी के इच्छा के कोना काटि सकई छी!’
सेक्रेटरी महोदय मोनेमोन, ‘हँ भले ओहि लेल जंगल कियेक ने कटि जाय!’ अपन मिनिस्ट्री छनि ककरो सँ आज्ञा लेब के सेहो कोनो काज नहि पड़तनि।
सेक्रेटरी महोदय ‘सरकार बहुते गाछ बृक्ष काट पड़तई, अहि नियम बनेलियई जे गाछ काटत ओकरा सजा देल जायत, आ परसूए एकटा ग्रामबासी के ओकर अपन गाछीमे का सुखेलहा गाछ काट लेल जेलमे बंद के देला पर अहिं छोड़ेने रहियई से मोन अछि की नहिं। मंत्री महोदय, सेक्रेटरी के अचानक जनता के हितैषी बनके कारण बुझि रहल छलखिन, ओ खौझायल छलाह कियेक ते अहि बेर विदेश दौरा मे हुनका संगे नहिं ले जा रहल छलखिन, आखिर संबंध मे हुनकर सार जे छलखिन। कोनो सिक्रेट नहिं रखई छलखिन, आ जे सिक्रेट नहिं रखलक ओ सेक्रेटरी कोन काज के! आ पत्नी के अहि प्रोजेक्ट के कारण एक तीर सँ दूटा निशान बला बात भऽ रहल छलनि! जीबनमे पहिल बेर पत्नी कोनो काजके बुझना गेल छलनि। मंत्री महोदय सेक्रेटरी महोदय के हाथ दबाक बजला ‘ओकरा कोना बुझेतई जे हम ओकर जनप्रतिनिधि छियई, आ ओकरा सबहक संगे ठार रहई छियई आ ओकरा सबहक संगे सरकारी महकमा के लोकसब हमरा रहैत किछु गलत नहिं के सकईत छई,कनि बुझियउ ई सब गप्पसब!’
अहाँ श्रीमती जी के संगे ले, के दू-चारिटा जंगल देखा दियउन, आ प्रेस बला सबके बजा के कहि देबनि जे जंगल सुरक्षा आ आदिवासी सबहक हालचाल पूछ लेल मंत्री महोदय के पत्नी जंगल-जंगल घूमि के देखि रहल छथिन। ई आदेश सेक्रेटरी महोदय के दे के ओ अपन ऑफिस दिस बिदा भेला ग्लोबल वार्मिंग पर चर्चा कर लेल कोन देश मे कतेक दिन रहता ताहि पर चर्चा करबाक लेल!

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