मुख्यपृष्ठनमस्ते सामनाफुहारों वाला बचपन बाल कविता

फुहारों वाला बचपन बाल कविता

-डॉ. प्रियंका सौरभ

पानी की जब चली फुहार,
खिल उठता बच्चों का संसार।
हंसी उड़ाती संग हवाएं,
मस्ती-गीत सभी मिल गाएं।

हरी घास पर नंगे पांव,
भागें बच्चे लेकर चाव।
कोई कूदे, कोई नाचे,
मन के रंग सभी पर छाएं।

स्लाइड, झूले और मैदान,
बन जाते खुशियों की खान।
छोटी-छोटी प्यारी बातें,
भर दें मन में मीठी रातें।

न चिंता कल की, न डर कोई,
बचपन जैसा सुंदर न होई।
पानी संग हंसता हर पल,
जैसे खिलता प्यारा कमल।

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