अनिल मिश्र / पटना
सीबीएससी परीक्षा परिणाम में भयंकर हेराफेरी होने से लाखों बच्चे और उनके माता-पिता सदमे में हैं। इस संबंध में बिहार प्रदेश कांग्रेस कमिटी के प्रदेश प्रतिनिधि प्रो. विजय कुमार मिट्ठू, पूर्व विधायक मोहम्मद खान अली, जिला कांग्रेस उपाध्यक्ष बाबूलाल प्रसाद सिंह, दामोदर गोस्वामी, विशाल कुमार, इंटक जिला महासचिव टिंकू गिरी, मुन्ना मांझी आदि ने कहा कि जिस कंपनी सीओएएमपीटी को परीक्षा परिणाम तैयार करने की जिम्मेदारी मिली, वह पहले ग्लोबरेना के नाम से तेलंगाना में वर्ष 2019 में भी गलत कारनामे कर चुकी है।
इन सभी नेताओं ने कहा कि डिजिटल कंपनी का नाम बदल गया, लेकिन नियत और फितरत वही रही। इसका इतिहास सबको पता था, फिर भी सीबीएससी द्वारा उसे ठेका दिया गया। ऐसी कंपनी के हाथ में 18 लाख 50 हजार बच्चों का भविष्य सौंप दिया गया और किसी को फर्क नहीं पड़ा।
इस बीच नेताओं ने इस पूरे घोटाले के असली दोषियों को सामने लाने के लिए स्वतंत्र न्यायिक जांच तथा एसआ
के गठन की मांग की है। नेताओं ने कहा कि जब इस मामले को गंभीरता से लेते हुए कांग्रेस पार्टी के सर्वमान्य नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने संसद से सड़क तक मुद्दा उठाया, तो केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा देने के बजाय यह कह रहे हैं कि सीबीएससी के 40 करोड़ पन्नों की जांच में बड़ी चूक हुई है, जिसके लिए री-इवैल्यूएशन शुरू किया जाएगा।
नेताओं ने कहा कि जब केंद्रीय शिक्षा मंत्री स्वयं 12वीं के मूल्यांकन में हुई गंभीर विसंगतियों और तकनीकी गड़बड़ियों को स्वीकार कर चुके हैं, तो उन्हें नैतिक आधार पर इस्तीफा दे देना चाहिए।
