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प्रोजेक्ट पड़ताल : बांद्रा-वर्सोवा सी-लिंक परियोजना की धीमी रफ्तार …६ साल बाद भी महज ३०% हुआ काम

-जुलाई २०२७ में कैसे पूरा होगा प्रोजेक्ट

ब्रिजेश पाठक
मुंबई में ट्रैफिक समस्या दिन -प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। पश्चिमी एक्सप्रेस हाइवे और अन्य उपनगरीय इलाकों पर ट्रैफिक का दबाव कम करने के लिए महाराष्ट्र स्टेट रीजनल डेवलपमेंट कारपोरेशन (एमएसआरडीसी) द्वारा बांद्रा-वर्सोवा सी-लिंक का निर्माण किया जा रहा है। इस प्रोजेक्ट की गति की बात करें तो अब तक केवल ३० प्रतिशत काम पूरा किया गया है। वर्ष २०१९ में शुरू इस परियोजना की डेडलाइन २०२७ तय की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर प्रोजेक्ट की यही रफ्तार रही तो डेडलाइन आगे खिसकनी तय है।

विशेषज्ञों के मुताबिक, समुद्र में ब्रिज निर्माण अत्यंत जटिल और समय-साध्य होता है। समुद्री लहरों, ज्वार-भाटों और मौसम की अनिश्चितता निर्माण कार्य को प्रभावित कर सकती है एवं मानसून में काम की रफ्तार धीमी हो जाती है। मुंबई में लंबी और तीव्र मानसून अवधि निर्माण को धीमा कर सकती है। मिली जानकारी के मुताबिक, मुख्य सी लिंक की लंबाई ९.८ किलोमीटर है जिसमें एक ३०० मीटर लंबा केबल-स्टे ब्रिज शामिल है। इसके अलावा, परियोजना में चार कनेक्टर्स भी शामिल किए गए हैं, जिसमें बांद्रा कनेक्टर २.२ किमी (२-२ लेन), कार्टर रोड कनेक्टर २.६ किमी (३-३ लेन), जुहू कोलीवाड़ा कनेक्टर २.६ किमी (३-३ लेन) (१२० मीटर लंबा केबल-स्टे ब्रिज शामिल है) और नाना-नानी पार्क कनेक्टर (३-३ लेन) जो २.७ किलोमीटर का है और इसी में ३०० मीटर लंबा केबल-स्टे ब्रिज शामिल है। इस परियोजना में टोल प्लाजा की भी विशेष व्यवस्था की गई है। जुलाई तक इस परियोजना की भौतिक प्रगति ३०.३७ प्रतिशत और वित्तीय प्रगति ३०.०३ प्रतिशत दर्ज की गई है। इसकी अनुमानित लागत १८,१२०.९६ करोड़ रुपए है और इसे जुलाई २०२७ तक पूरा करने का लक्ष्य है।

बताया जा रहा है कि सी-लिंक तैयार हो जाने के बाद वेस्टर्न एक्सप्रेस हाइवे पर ट्रैफिक का बोझ कम होगा। उत्तर-दक्षिण मुंबई के बीच सफर का समय घटेगा एवं कार्टर रोड, जुहू और वर्सोवा जैसे इलाकों को बेहतर संपर्क मिलेगा।

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