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बीमा नहीं धोखा निकली आयुष्मान भारत योजना! …मुंबई की महिला का फूटा गुस्सा

-कहा, ५ लाख की स्कीम है सिर्फ दिखावा
-बीमार पिता को भर्ती करने में हुआ दर्दनाक अनुभव
-अस्पताल-दर-अस्पताल पड़ा भटकना
सामना संवाददाता / मुंबई
सरकारी प्रचार में भले ही आयुष्मान भारत योजना को गरीबों के लिए वरदान बताया जा रहा हो, लेकिन हकीकत में यह योजना एक बड़े प्रशासनिक मजाक से कम नहीं दिखाई दे रही है। मुंबई की एक जागरूक और शिक्षित महिला ने खुद इस योजना की सच्चाई उजागर करते हुए सोशल मीडिया पर सवालों की बौछार कर दी है। बीमार पिता के इलाज के लिए जब महिला ने योजना के तहत पांच लाख रुपए के बीमा कवर का सहारा लेना चाहा तो उन्हें न केवल अस्पताल दर अस्पताल भटकना पड़ा, बल्कि योजना से जुड़ी झूठी उम्मीदों की भी असली तस्वीर देखने को मिली। इस पूरी घटना ने न सिर्फ योजना की पहुंच और पारदर्शिता पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि यह भी दिखा दिया कि अगर एक साक्षर शहरी महिला को इलाज नहीं मिल पा रहा, तो देश के दूर-दराज के गरीबों के लिए यह स्कीम सिर्फ कागजी सपना बनकर रह गई है।

१० अस्पतालों ने साफ किया इनकार
१० अस्पतालों ने साफ इनकार कर दिया कि वे आयुष्मान भारत योजना से जुड़े हैं, जबकि ६ अस्पतालों के नंबर लगातार व्यस्त या बंद मिले। इसी तरह बाकी बचे अस्पतालों ने अजीबो-गरीब शर्तें थोप दीं। इसमें किसी ने कहा योजना सिर्फ कैंसर के लिए मान्य है तो किसी ने बताया कि यह केवल आईसीयू मरीजों के लिए ही लागू होती है। महिला ने सवाल किया कि एक सामान्य गंभीर मरीज आखिर कहां जाए। उनकी इस पीड़ा ने योजना की जमीनी हकीकत और क्रियान्वयन में भारी खामियों को उजागर कर दिया है।

योजना की पारदर्शिता पर सवाल
दावे से बहुत दूर हकीकत

महिला के मुताबिक, उन्होंने सेवानिवृत्त ६७ साल के पिता सुबह ५.३० बजे के आसपास गंभीर रूप से बीमार हो गए। महिला ने तुरंत आयुष्मान भारत योजना के तहत सूचीबद्ध अस्पतालों से संपर्क करना शुरू किया। उन्हें उम्मीद थी कि योजना के तहत मिलनेवाला पांच लाख का बीमा कवर उनके पिता के इलाज में मदद करेगा। इसके तहत महिला ने पिता को अस्पताल में भर्ती कराने के लिए मुंबई, ठाणे और नई मुंबई के कुल २४ अस्पतालों में कॉल किया, लेकिन उन्हें कहीं से भी कोई मदद नहीं मिली। महिला की आपबीती ने इस योजना की पारदर्शिता, पहुंच और जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। खासकर, जब यह योजना देश के ५० करोड़ से अधिक लोगों को कवर करने का दावा करती है। इसके साथ ही योजना के तहत यह भी दावा किया गया है कि यह हर साल पांच लाख तक का वैâशलेस इलाज उपलब्ध कराती है, लेकिन जमीनी हकीकत इस दावे से बहुत दूर नजर आती है। इस पूरे मामले पर राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण या राज्य स्वास्थ्य अधिकारियों की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

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