उमेश गुप्ता / वाराणसी
पैगंबरे इस्लाम हजरत मोहम्मद की पैदाइश (ईद मिलादुन्नबी) का जश्न शुक्रवार को पूरी अकीदत और एहतराम के साथ मनाया गया। जोश और खुशी के माहौल में शहर में जगह-जगह से कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच पूरे शानो-शौकत के साथ जुलूस-ए-मोहम्मदी निकाली गई।
इस दौरान लोगों ने पैगंबर मोहम्मद साहब के बताए रास्ते पर चलने का संकल्प लिया। जुलूस में शामिल बच्चों और युवाओं के साथ बुर्जुग भी लकदक कुर्ता पायजामा पहने, सिर पर रंग बिरंगा साफा बांधे इस्लामिक झंडे के साथ राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा लहराते हुए चलते दिखे। जुलूस में हुजूर की आमद मरहबा, सरकार की आमद मरहबा की गूंज के बीच नबी की शान में नातिया कलाम भी युवा और उलेमा पूरे राह पढ़ते रहे।
फज्र की नमाज के बाद उठे जुलूस में बच्चे, युवा और बुर्जुग वाहन पर सवार होकर या पैदल ही शामिल हुए। मरकजी दावते इस्लामी जुलूसे मुहम्मदी कमेटी एवं मुफ्ती बोर्ड के सदर की निगरानी में मुख्य जुलूस रेवड़ी तालाब के अजगरी मैदान से उठा। इसमें शिवाला, बजरडीहा, ककरमत्ता, मदनपुरा इलाके के जुलूस भी शामिल हो गए। सभी जुलूस रेवड़ी तालाब के अजगरी मैदान से भेलूपुर, गौरीगंज, रवींद्रपुरी, शिवाला, सोनारपुरा, मदनपुरा, गोदौलिया, चौक, मैदागिन, कबीरचौरा, पियरी होते हुए बेनियाबाग मैदान पहुंचे। रास्तों में विभिन्न सामाजिक संस्थाओं के कार्यकर्ताओं ने जुलूस में शामिल लोगों को शरबत और पानी पिलाया। उधर, शक्करतालाब, जलालीपुरा, गोलगड्डा, पीलीकोठी, अर्दलीबाजार, हुकुलगंज आदि इलाकों से निकले जुलूस भी बेनिया मैदान पहुंचे थे। बेनियाबाग मैदान में उलेमा ने नबी की पैदाइश पर रोशनी डाली। शायरों ने कलाम पेश किया। वहीं, जिले के ग्रामीण अंचल में भी जुलूस ए मोहम्मदी शान से निकाला गया।
इसके पूर्व बेनियाबाग क्षेत्र से मरकजी यौमुन्नबी कमेटी ने 80 सालों की अपनी परम्परा को निभाते हुए जुलूस ए मोहम्मदी निकाला। जुलूस में 50 अंजुमनों ने शिरकत की और जिसमें छह अंजुमनों को बेहतरीन नात पढ़ने के लिए सम्मानित किया गया। रात्रि में बेनिया बाग से शुरू हुआ जुलूस हड़हा सराय, नया चौक, दालमंडी, नई सड़क से होते हुए बिस्मिल्लाह खां के आवास के निकट पहुंच कर समाप्त हुआ। वाराणसी शहर में रेवड़ी तालाब, नदेसर, बड़ी बाजार सहित अन्य स्थानों पर भी जुलूस निकला। जिसमें बड़ी संख्या में युवाओं और अंजुमनों ने शिरकत की। ईदमिलादुन्नबी के अवसर पर लोगों ने शहर के सभी छोटे बड़े मस्जिदों के साथ इबादतगाहों और घरों को भी आकर्षक विद्युत झालरों से सजाया था। जो लोगों बरबस अपनी ओर आकर्षित कर रहा था।
