मुख्यपृष्ठस्तंभखाड़ी में राहत की उम्मीद तेल बाजार में गिरावट!

खाड़ी में राहत की उम्मीद तेल बाजार में गिरावट!

अमेरिका-ईरान शांति समझौता

पश्चिम एशिया में महीनों से जारी तनाव के बीच अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित शांति समझौते ने पूरी दुनिया का ध्यान खींच लिया है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ द्वारा समझौते की पुष्टि किए जाने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी दावा किया कि ईरान के साथ शांति समझौता पूरा हो चुका है। प्रस्तावित समझौते पर १९ जून को स्विट्जरलैंड में औपचारिक हस्ताक्षर होने की बात कही जा रही है। हालांकि, अंतिम दस्तावेज सामने आने तक कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर असमंजस बना हुआ है।
ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ पर कहा कि यह समझौता पूरे क्षेत्र में शांति और सुरक्षा स्थापित करने की दिशा में बड़ा कदम साबित होगा। उन्होंने दावा किया कि उनसे पहले कई अमेरिकी राष्ट्रपतियों ने ईरान के साथ स्थायी शांति की कोशिश की, लेकिन सफलता नहीं मिली। ट्रंप के अनुसार, समझौते के बाद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पूरी तरह मुक्त किया जाएगा, नौसैनिक नाकेबंदी हटाई जाएगी और समुद्री मार्ग से तेल आपूर्ति फिर सामान्य हो सकेगी।
खाड़ी क्षेत्र में तनाव कम होने की उम्मीद का असर अंतर्राष्ट्रीय तेल बाजार पर तुरंत दिखाई दिया। वैश्विक बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड की कीमतों में करीब ३.९ प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और भाव लगभग ८४ डॉलर प्रति बैरल तक आ गया। वहीं अमेरिकी क्रूड डब्ल्यूटीआई करीब ४.८ प्रतिशत गिरकर लगभग ८१ डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। तेल कीमतों में आई यह गिरावट भारत जैसे आयातक देशों के लिए राहत का संकेत मानी जा रही है।
समझौते को लेकर अमेरिकी उप राष्ट्रपति जेडी वेंस के हस्ताक्षर समारोह में शामिल होने की संभावना भी जताई जा रही है। वेंस ने कहा कि वे समारोह में मौजूद रहने की उम्मीद कर रहे हैं, लेकिन अंतिम निर्णय राष्ट्रपति ट्रंप पर निर्भर करेगा। सुरक्षा प्रोटोकॉल के कारण यह अभी स्पष्ट नहीं है कि अमेरिका का प्रतिनिधित्व राष्ट्रपति करेंगे या उप राष्ट्रपति।
दूसरी ओर, समझौते की घोषणा के बावजूद क्षेत्र में पूरी तरह शांति कायम नहीं हुई है। कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया है कि बमबारी की घटनाएं अभी भी जारी हैं, जिससे समझौते की स्थिरता पर सवाल उठ रहे हैं। ईरान की ओर से भी अंतिम बातचीत से पहले कुछ शर्तें रखे जाने की बात सामने आई है। रिपोर्टों के अनुसार, तेहरान को ३०० अरब डॉलर के पुनर्निर्माण पैकेज, २४ अरब डॉलर की फ्रिज संपत्तियों की रिहाई और तेल प्रतिबंधों में राहत जैसे लाभ मिल सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता यदि औपचारिक रूप से लागू होता है, तो पश्चिम एशिया में तनाव कम हो सकता है और वैश्विक ऊर्जा बाजार को बड़ी राहत मिल सकती है। लेकिन परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंधों की वापसी और होर्मुज जलडमरूमध्य की वास्तविक स्थिति जैसे मुद्दे अभी निर्णायक परीक्षा होंगे। इसलिए दुनिया की नजरें अब १९ जून को स्विट्जरलैंड में होने वाले संभावित हस्ताक्षर समारोह पर टिकी हैं।

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