मुख्यपृष्ठनए समाचारएयरफोर्स के विंग कमांडर ने की ‘गद्दारी’!.. खूबसूरत हसीना का बना...

एयरफोर्स के विंग कमांडर ने की ‘गद्दारी’!.. खूबसूरत हसीना का बना शिकार… पाकिस्तान को बेची देश की सुरक्षा!

सामना संवाददाता / नई दिल्ली

हनीट्रैप का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। इंडियन एयरफोर्स के एक अधिकारी को पाकिस्तान के साथ मिलिट्री इंटेलिजेंस से जुड़ी संवेदनशील सूचनाएं साझा करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। दिल्ली पुलिस की टीम फिलहाल इस बात का पता लगाने में जुटी है कि वायुसेना के आरोपी अधिकारी ने दुश्मन देश के स्पाई को किस तरह की सूचनाएं मुहैया करार्इं।
बताया जाता है कि आरोपी अधिकारी निजी जिंदगी में कठिन दौर से गुजर रहा था। इसी दौरान वह पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी की ओर से प्लांट की गई एक महिला के संपर्क में आया। लगातार बातचीत होने के बाद उस महिला ने आरोपी अधिकारी का विश्वास हासिल कर लिया और फिर उससे राष्ट्रीय रक्षा से जुड़ी सूचनाएं हासिल करने लगी।
सहयोगी के मोबाइल में स्पाई सॉफ्टवेयर भी किया इंस्टॉल
एयरफोर्स के आरोपी अधिकारी ने कथित तौर पर अपने एक सहयोगी के मोबाइल फोन में स्पाई सॉफ्टवेयर भी इंस्टॉल कर दिया, जिससे पाकिस्तानी हैंडलर को संवेदनशील सूचनाएं आसानी से मिलने लगीं। भारतीय वायुसेना के एक विंग कमांडर को संवेदनशील रक्षा संबंधी जानकारी कथित तौर पर साझा करने के आरोप में दिल्ली पुलिस ने करीब दो महीने पहले गिरफ्तार किया था। अधिकारी के खिलाफ ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है और वह फिलहाल न्यायिक हिरासत में है।
जांच एजेंसियों को संदेह है कि यह मामला पाकिस्तान से संचालित किए जा रहे एक बड़े जासूसी नेटवर्क से जुड़ा हो सकता है। ‘इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट के अनुसार, वायुसेना के इस अधिकारी को ३१ मई की रात गिरफ्तार किया गया था। गिरफ्तारी से पहले वायुसेना की खुफिया शाखा (एयरफोर्स इंटेलिजेंस विंग) ने दिल्ली पुलिस के साथ मामले से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी साझा की थी। शुरुआती पूछताछ के बाद आरोपी को पुलिस हिरासत में लिया गया और बाद में तिहाड़ जेल भेज दिया गया। उस पर राष्ट्रीय रक्षा से जुड़े गोपनीय दस्तावेज और वर्गीकृत सूचनाएं साझा करने का आरोप है।
क्या बोली वायुसेना
एयरफोर्स के प्रवक्ता ने मामले की पुष्टि करते हुए कहा कि अधिकारी पर सक्रिय निगरानी रखी जा रही थी और उसे उपयुक्त एजेंसियों को सौंप दिया गया था। जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार, अधिकारी निजी जिंदगी में कठिन दौर से गुजर रहा था। इसी दौरान सोशल मीडिया के जरिए एक महिला ने उससे संपर्क किया। दोनों के बीच बातचीत शुरू हुई और बाद में वीडियो कॉल के जरिए भी संपर्क बढ़ा।
आरोप है कि महिला ने धीरे-धीरे उसका विश्वास हासिल करने के बाद उससे सैन्य इकाइयों की तैनाती और आवाजाही से जुड़ी तस्वीरें, वीडियो और अन्य जानकारी साझा करने को कहा।
पाकिस्तानी हनीट्रैप मॉड्यूल
पुलिस के मुताबिक, जांच के दौरान यह भी सामने आया कि अधिकारी ने डिजिटल माध्यमों से महिला को महत्वपूर्ण दस्तावेज और डेटा भेजे थे। इसके बाद महिला ने कथित तौर पर उसे एक सहकर्मी के मोबाइल फोन में एक विशेष ऐप इंस्टॉल करने के लिए कहा। जांचकर्ताओं का मानना है कि यह ऐप डेटा चुराने, लोकेशन ट्रैक करने या कम्युनिकेशन को इंटरसेप्ट करने में सक्षम लक्षित स्पाइवेयर अथवा रिमोट-एक्सेस मालवेयर हो सकता है। सूत्रों का दावा है कि सोशल मीडिया पर संपर्क करने वाली महिला पाकिस्तान स्थित हैंडलर्स के निर्देश पर काम कर रही थी। पुलिस को आशंका है कि यह पूरा ऑपरेशन रक्षा कर्मियों को निशाना बनाने और उनसे गोपनीय सैन्य जानकारी हासिल करने वाले एक बड़े हनीट्रैप मॉड्यूल का हिस्सा था।
जासूसी नेटवर्क को खंगालने में जुटी पुलिस
जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि अधिकारी द्वारा साझा की गई जानकारी से राष्ट्रीय सुरक्षा को कितना नुकसान हो सकता था और क्या इसका इस्तेमाल भारत में किसी शत्रुतापूर्ण गतिविधि को अंजाम देने के लिए किया जाना था। पुलिस डिजिटल कम्युनिकेशन की पूरी कड़ी खंगाल रही है और कथित विदेशी हैंडलर्स की पहचान तथा नेटवर्क में उनकी भूमिका का पता लगाने का प्रयास कर रही है। अधिकारियों के मुताबिक, जांच का अगला महत्वपूर्ण चरण यह निर्धारित करना है कि कितनी संवेदनशील जानकारी लीक हुई और क्या इस जासूसी नेटवर्क से अन्य लोग भी जुड़े हैं।

अन्य समाचार