– नाईक-शिंदे में फिर बढ़ी तकरार!
-दोनों की लड़ाई अब सिडको तक पहुंची
सामना संवाददाता / नई मुंबई
महायुति के भीतर नई मुंबई में क्लस्टर योजना और यूडीसीपीआर को लेकर चल रही खींचतान के बीच अब वन मंत्री गणेश नाईक और उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के बीच टकराव बढ़ गया है। इस बार विवाद का केंद्र सिडको बना है। सिडको द्वारा नई मुंबई महानगरपालिका से पानी की मांग और पानी नहीं देने पर ४०० करोड़ रुपए का नोटिस जारी किए जाने के बाद गणेश नाईक ने सिडको को खुले तौर पर चेतावनी दी है। गणेश नाईक ने दो टूक कहा कि दादागीरी कोई करेगा तो उसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। दादागीरी करोगे तो तोड़कर रख दिया जाएगा। नाईक के इस बयान को सिडको के साथ-साथ एकनाथ शिंदे के प्रभाव वाले प्रशासनिक तंत्र को भी सीधा राजनीतिक संदेश माना जा रहा है।
नाईक के इस आक्रामक रुख से महायुति के भीतर एक बार फिर शक्ति-संतुलन का सवाल उठ खड़ा हुआ है। नई मुंबई की राजनीति में लंबे समय से गणेश नाईक और एकनाथ शिंदे के गुटों के बीच प्रभाव को लेकर प्रतिस्पर्धा देखी जाती रही है। अब क्लस्टर योजना और यूडीसीपीआर के बाद पानी के सवाल ने इस राजनीतिक टकराव को एक नया मुद्दा दे दिया है।
पानी के मुद्दे पर सिडको को ललकारा
नवी मुंबई में विकास कार्यों का निरीक्षण करने के बाद गणेश नाईक ने मीडिया से बातचीत में कहा कि सिडको ने नई मुंबई महानगरपालिका से ५७ एमएलडी पानी की मांग की थी। महानगरपालिका द्वारा पानी देने से इनकार किए जाने के बाद सिडको ने कथित बकाया राशि का हवाला देते हुए मनपा को ४०० करोड़ रुपए का नोटिस भेज दिया। इसी मुद्दे पर नाईक का गुस्सा फूट पड़ा।
उन्होंने कहा कि नोटिस जारी करने की दादागीरी स्वीकार नहीं की जाएगी। नाईक ने कहा कि अगर ऐसा नोटिस जारी करने की हिम्मत किसी ने की है तो उसे निश्चित रूप से पछताना पड़ेगा। स्थायी रूप से पानी नहीं देने के कारण कोई दादागीरी करेगा तो उसे तोड़ दिया जाएगा।
नई मुंबई मनपा कमजोर लोगों की संस्था नहीं
गणेश नाईक ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि नई मुंबई महानगरपालिका कमजोर लोगों की संस्था नहीं है। उन्होंने सिडको की भूमिका पर नाराजगी जताते हुए यह भी स्पष्ट किया कि सिडको को स्थायी रूप से पानी नहीं दिया जाएगा। गणेश नाईक पहले भी नवी मुंबई से जुड़े विकास और नियोजन के मुद्दों पर सरकार की नीतियों को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर कर चुके हैं। अब उनके द्वारा सीधे सिडको को चेतावनी दिए जाने से राजनीतिक संदेश साफ है।
