-न्यायालय में सुनवाई शुरू होने के दौरान ये ‘गद्दार’ मोदी से क्यों मिले?
-मोदी अदालत को धमका रहे हैं क्या?
सामना संवाददाता / मुंबई
शिवसेना से अलग हुए ‘गद्दार’ सांसदों और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मुलाकात पर शिवसेनापक्षप्रमुख उद्धव ठाकरे ने कल जोरदार हमला बोला। उन्होंने कहा कि शिवसेना पार्टी और चुनाव चिह्न को लेकर सुनवाई अदालत में चल रही है। ऐसे में ये ‘गद्दार’ मोदी से क्यों मिले? ‘डरो मत, मैं तुम्हारे साथ हूं’, ऐसा ‘गद्दारों’ से कहकर मोदी किसे धमका रहे हैं? क्या वे सर्वोच्च न्यायालय को धमका रहे हैं? ठाकरे ने मांग की कि न्यायालय को इसका संज्ञान लेकर मोदी से जवाब मांगना चाहिए। ‘मातोश्री’ निवास पर आयोजित पत्रकार परिषद में वे बोल रहे थे।
जंतर-मंतर पर आंदोलन कर रहे छात्रों पर जिस तरह अत्याचार किया गया, वह जलियांवाला बाग हत्याकांड की याद दिलाता है। अपने न्यायसंगत अधिकारों के लिए लड़ रहे इन बच्चों से मिलने में मोदी को शर्म महसूस होती है। उनके पास इसके लिए समय नहीं है, संसद में आने का समय नहीं है, लेकिन शिवसेना को चुराकर ‘शाह सेना’ बनाने वाले ‘गद्दारों’ से मिलने के लिए उनके पास समय है, ऐसा आक्रोश उद्धव ठाकरे ने व्यक्त किया।
यह धमकी भरा संदेश अदालत को, शाह को, फडणवीस को या संभावित ‘गद्दारों’ को?
उद्धव ठाकरे ने कहा कि ‘डरो मत, मैं तुम्हारे साथ हूं, यह मोदी को वास्तव में आंदोलन कर रहे युवाओं से कहना चाहिए था। लेकिन उन्होंने बेशर्मी से ‘गद्दारों’ से मुलाकात कर यह बात कही। यह बहुत अजीब है। यह धमकी भरा संदेश उन्होंने आखिर किसे दिया? न्यायालय को, अमित शाह को, देवेंद्र फडणवीस को, प्रशासन को या अन्य दलों में मौजूद संभावित ‘गद्दारों’ को? इसका खुलासा होना चाहिए।
उद्धव ठाकरे ने कहा कि यह गंभीर मामला है और उन्होंने इस मामले में शिवसेना नेता एवं सांसद अनिल देसाई को निर्देश दिया कि वे सर्वोच्च न्यायालय के संज्ञान में इस विषय को लाएं।
अब ‘गद्दारों’ का बॉस बदल गया है
उद्धव ठाकरे ने कहा कि पहले ‘गद्दार’ ‘शाह सेना’ के प्रमुख अमित शाह से मिला करते थे। अब उनका बॉस बदल गया है। शाह के महाराष्ट्र में रहते हुए ‘गद्दार’ मोदी से मिलते हैं।
तमाम देशभक्तों से अपील
उद्धव ठाकरे ने कहा कि गद्दारी का वायरस पूरे देश में पैâल गया है। यह लड़ाई अब केवल शिवसेना तक सीमित नहीं रही है। जिन लोगों को लोकतंत्र और संविधान से प्रेम है, जो लोकतंत्र और संविधान को बचाना चाहते हैं, उन सभी देशभक्तों को इस लड़ाई में शामिल होना चाहिए।
इंस्टाग्राम से सरकार चलाने की भाजपा पर आई नौबत
जेन-जी आंदोलन शुरू होने के बाद प्रधानमंत्री मोदी द्वारा इंस्टाग्राम पर लगातार साझा किए जा रहे वीडियो को लेकर उद्धव ठाकरे ने भाजपा पर तंज कसा। उन्होंने कहा कि कोरोना के समय जब मैं फेसबुक लाइव कर रहा था, तब भाजपा वाले मुझे उपदेश देते थे कि फेसबुक से सरकार नहीं चलती। अब उन पर इंस्टाग्राम से सरकार चलाने की नौबत आ गई है।
शाह का इस्तीफा लेकर सरसंघचालक युवाओं से बात करें!
आरएसएस के सरसंघचालक मोहन भागवत द्वारा हाल ही में जेन-जी से संवाद किए जाने पर भी उद्धव ठाकरे ने निशाना साधा। उन्होंने कहा कि यह भागवत का एक दयनीय प्रयास था। युवा उनकी बात सुनने की मानसिकता में नहीं हैं। उन्होंने कहा, ‘हमें प्रवचन मत दीजिए। सरकार आपकी है। आपने ही इसे लाया है। इसमें सुधार करवाइए। जब यह सरकार युवाओं के साथ क्रूरता से व्यवहार कर रही थी, तब आप चुप क्यों थे? युवाओं से मिलने क्यों नहीं गए? युवा यही सवाल पूछ रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरसंघचालक को पहले अमित शाह का इस्तीफा लेना चाहिए और उसके बाद युवाओं से संवाद करना चाहिए।
अदालत के फैसले को
प्रभावित करने का प्रयास हो रहा है?
उद्धव ठाकरे ने कहा कि पिछले चार वर्षों से शिवसेना पार्टी से संबंधित मामला लंबित था और अब उसकी सुनवाई शुरू हुई है। यह सुनवाई लगभग अंतिम चरण में पहुंच गई है। उन्होंने कहा कि मामला न्यायप्रविष्ट होने के कारण उन्होंने अब तक इस पर कभी टिप्पणी नहीं की। न्यायालय के प्रति शिवसेना का सम्मान है और शिवसेना को संविधान के अनुसार फैसला चाहिए। संविधान के अनुसार देखा जाए तो ‘गद्दार’ सरकार बना ही नहीं सकते थे, ऐसा उद्धव ठाकरे ने कहा। ‘गद्दार’ सांसद मोदी से मिले, इसका असर सर्वोच्च न्यायालय के पैâसले पर नहीं होगा, लेकिन मोदी और ‘गद्दारों’ की मुलाकात से ऐसा संदेह जरूर पैदा हुआ है।
कांग्रेस से जो ६० साल में नहीं हुआ, वह भाजपा ने कर दिखाया
उद्धव ठाकरे ने व्यंग्य करते हुए कहा कि कांग्रेस पिछले ६० वर्षों में जो नहीं कर सकी, वह भाजपा ने करके दिखा दिया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेसियों ने कभी जितनी गालियां नहीं खाई थीं, उससे कहीं ज्यादा गालियां और बदनामी प्रधानमंत्री मोदी और गृहमंत्री शाह के हिस्से में आई हैं। देश की मौजूदा स्थिति को देखते हुए उन्होंने कहा कि वातावरण में कम दबाव का क्षेत्र बन चुका है और यह तूफान से पहले की शांति है।
