मुख्यपृष्ठस्तंभअतीक खत्म हुआ, क्या उसका ‘साम्राज्य’ भी खत्म हो गया?

अतीक खत्म हुआ, क्या उसका ‘साम्राज्य’ भी खत्म हो गया?

-छोटे बेटे आबान की मौत ने फिर खोली अतीक परिवार की फाइल; पिता-चाचा-असद की मौत, दो बेटे जेल में, मां फरार-लेकिन बेनामी दौलत और पुराने नेटवर्क पर अभी भी जांच

क्राइम इन्वेस्टिगेशन / प्रयागराज
६ अगस्त २०२६। झांसी-कानपुर हाईवे पर एक तेज रफ्तार कार दुर्घटनाग्रस्त होती है। हादसे में दो लोगों की मौत हो जाती है। मरने वालों में एक नाम ऐसा था जिसने तीन साल बाद एक बार फिर प्रयागराज के उस परिवार को राष्ट्रीय सुर्खियों में ला दिया, जिसका नाम कभी उत्तर प्रदेश के सबसे ताकतवर माफिया नेटवर्क में गिना जाता था, आबान अहमद, अतीक अहमद का सबसे छोटा बेटा।
परिवार की तस्वीर: कोई कब्र में, कोई जेल में, कोई फरार
जिस अतीक अहमद के नाम से कभी प्रयागराज में सत्ता, जमीन, ठेके, राजनीति और अपराध की समानांतर दुनिया चलने के आरोप लगते थे, क्या उसका पूरा साम्राज्य वास्तव में खत्म हो चुका है? अतीक परिवार की मौजूदा तस्वीर देखें तो पहली नजर में साम्राज्य पूरी तरह बिखरा दिखाई देता है। अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की १५ अप्रैल २०२३ को प्रयागराज में पुलिस हिरासत के दौरान गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इससे महज दो दिन पहले अतीक का बेटा असद अहमद झांसी में उत्तर प्रदेश एसटीएफ के एनकाउंटर में मारा गया था। अब अगस्त २०२६ में सबसे छोटे बेटे आबान अहमद की सड़क हादसे में मौत हो गई। दूसरी तरफ अतीक के बेटे मोहम्मद उमर और अली अहमद जेल में हैं। आबान के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए दोनों को इलाहाबाद हाई कोर्ट से अस्थायी परोल मिली है।
शाइस्ता परवीन कहां है?
अतीक की पत्नी शाइस्ता परवीन अब भी फरार है। उमेश पाल हत्याकांड की साजिश से जुड़े मामले में पुलिस उसकी तलाश कर रही है। जानकारी के मुताबिक, पुलिस नौ राज्यों में ५०० से अधिक छापेमारी के बावजूद शाइस्ता, अतीक की बहन आयशा नूरी और अशरफ की पत्नी जैनब फातिमा तक नहीं पहुंच सकी थी। यानी परिवार बिखरा जरूर है, लेकिन उसकी एक महत्वपूर्ण कड़ी आज भी कानून की पकड़ से बाहर है।
‘साम्राज्य’ का असली तहखाना: जमीन और पैसा
अतीक के साम्राज्य की सबसे बड़ी ताकत बंदूक से ज्यादा जमीन और आर्थिक नेटवर्क को माना जाता रहा है। और यहीं कहानी दिलचस्प हो जाती है। यदि साम्राज्य खत्म हो चुका होता तो जुलाई २०२६ में अतीक की मौत के तीन वर्ष बाद सैकड़ों करोड़ रुपए की नई संपत्तियां कहां से सामने आतीं? २४ जुलाई २०२६ को प्रयागराज प्रशासन ने अतीक, उसके भाई अशरफ और पत्नी शाइस्ता से जुड़ी करीब ३४५ करोड़ रुपए की १८ चल-अचल संपत्तियां जब्त कीं। इनमें मकान, व्यावसायिक और आवासीय भूखंड, कृषि भूमि, बैंक जमा और वाहन शामिल बताए गए। १३ बैंक खातों को भी सीज किया गया।
संपत्तियां प्रयागराज, कौशाम्बी और लखनऊ तक फैली थीं। इतना ही नहीं। इसके सिर्फ चार दिन बाद, २८ जुलाई २०२६ को प्रयागराज पुलिस ने गैंगस्टर एक्ट के तहत लगभग २०.३८ बीघा जमीन कुर्क की, जिसकी अनुमानित कीमत करीब ११० करोड़ रुपए बताई गई। पुलिस का दावा है कि ये कथित बेनामी संपत्तियां थीं और अवैध कमाई से अर्जित की गई थीं। इसका सीधा अर्थ है अतीक की मौत हो गई, मगर उसकी संपत्तियों की खोज अभी खत्म नहीं हुई।
बेनामी संपत्तियों की भूलभुलैया
जुलाई २०२६ में सामने आई एक और जांच इस कहानी का शायद सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। अधिकारियों की जांच में संकेत मिले कि अतीक से कथित रूप से जुड़ी कई बेनामी संपत्तियां अभी भी एजेंसियों की सीधी पहुंच से बाहर हो सकती हैं। जांचकर्ताओं की नजर उन बिल्डरों, फाइनेंसरों और पुराने सहयोगियों पर भी गई जिनके जरिए कथित रूप से संपत्तियों की खरीद-बिक्री या उन्हें ठिकाने लगाने का प्रयास हो सकता है। कुछ करीबियों द्वारा ऐसी संपत्तियां बेचने की कोशिश किए जाने की आशंका भी जताई गई। और यही वह बिंदु है जहां ‘अतीक का साम्राज्य खत्म’ वाला दावा जांच की कसौटी पर कमजोर पड़ता है। क्योंकि माफिया का साम्राज्य केवल उसके नाम की जमीन नहीं होता। उसकी असली संरचना हो सकती है। बेनामी मालिक, मुखौटा खरीदार, फाइनेंसर, बिल्डर, प्रॉपर्टी डीलर, पुराने गुर्गे, राजनीतिक संपर्क और ऐसे लोग जिनके नाम पर वास्तविक मालिक अपनी संपत्ति छिपा सके। जब तक यह पूरा आर्थिक नेटवर्क नहीं खुलता, अंतिम हिसाब अधूरा रहेगा।
आबान की मौत के बाद परिवार का गणित
अतीक परिवार को एक प्रेम में रखिए, अतीक-मृत। अशरफ-मृत। असद-एनकाउंटर में मृत। आबान-सड़क दुर्घटना में मृत। उमर-जेल में। अली-जेल में। शाइस्ता-फरार। इस तस्वीर को देखकर कहा जा सकता है कि जिस परिवार के इर्द-गिर्द कभी शक्ति का केंद्रीकरण था, उसकी प्रत्यक्ष कमान लगभग समाप्त हो चुकी है। लेकिन अपराध के साम्राज्य परिवार के सदस्यों की गिनती से नहीं मापे जाते। उनका वास्तविक आकार मापा जाता है, पैसे से, जमीन से, बेनामी निवेश से, नेटवर्क से और उस नेटवर्क की अगली पीढ़ी तक पहुंच से।
तो क्या अतीक अहमद का साम्राज्य खत्म हो गया?
अतीक का प्रत्यक्ष राज, लगभग हां।
अतीक परिवार की पुरानी राजनीतिक ताकत, लगभग ध्वस्त।
उसके आतंक का पुराना सार्वजनिक स्वरूप, काफी हद तक टूट चुका है।
लेकिन उसकी पूरी आर्थिक विरासत, बेनामी संपत्तियां और पुराने नेटवर्क की आखिरी परत तक सफाई हो चुकी है, यह दावा अभी नहीं किया जा सकता। सबसे बड़ा प्रमाण खुद जुलाई २०२६ की कार्रवाई है। मौत के तीन साल बाद भी अगर ३४५ करोड़ रुपए की संपत्तियां और उसके कुछ ही दिन बाद करीब ११० करोड़ रुपए की दूसरी जमीन सामने आती है, तो सवाल स्वाभाविक है, अभी और कितना दबा है? आबान की सड़क दुर्घटना में मौत अतीक परिवार की निजी त्रासदी का नया अध्याय है, लेकिन जांच एजेंसियों के लिए असली कहानी किसी कब्रिस्तान में खत्म नहीं होती। वह कहानी आज भी रजिस्ट्री कार्यालयों, बैंक खातों, बेनामी सौदों, पुराने कारोबारियों, बिल्डरों और उस नेटवर्क की फाइलों में दबे नामों के बीच खोजी जा रही है।
अतीक नहीं रहा। उसका परिवार बिखर चुका है। लेकिन ‘अतीक साम्राज्य’ की बैलेंस शीट अभी पूरी तरह बंद हुई है, ऐसा कहना शायद जल्दबाजी होगी।
सबसे बड़ा सवाल, क्या गैंग भी खत्म हो गया?
इसका उत्तर भी शायद अभी ‘हां’ नहीं है। हिंदुस्तान टाइम्स की जुलाई २०२६ की रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस को संदेह है कि अतीक के पुराने आईएस-२२७ गिरोह के कुछ हिस्से दोबारा संगठित होने की कोशिश कर सकते हैं और जेल में बंद अली अहमद की भूमिका भी जांच के दायरे में बताई गई। यह पुलिस का संदेह है, सिद्ध तथ्य नहीं। लेकिन यही संदेह बताता है कि एजेंसियां भी पुराने नेटवर्क को पूरी तरह मृत मानकर फाइल बंद नहीं कर रही हैं।

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