सुनील ओसवाल / मुंबई
सूखा, आरक्षण और बेरोजगारी के मुद्दों पर विपक्ष करेगा घेराबंदी
महाराष्ट्र विधानमंडल का मानसून सत्र २२ जून से मुंबई में शुरू होकर १० जुलाई तक चलेगा। १९ दिनों तक चलने वाला यह सत्र मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली महायुति सरकार के लिए बड़ी राजनीतिक परीक्षा माना जा रहा है। राज्य में कमजोर मानसून, किसानों की बढ़ती समस्याएं, आधी-अधूरी कर्जमाफी पर सवाल, मराठा-ओबीसी आरक्षण विवाद, बेरोजगारी और महायुति के भीतर की नाराजगी जैसे मुद्दों पर विपक्ष सरकार को घेरने की तैयारी में है।
राजनीतिक माहौल पहले से ही गर्म है। ऐसे में यह सत्र केवल विधायी कामकाज तक सीमित न रहकर सरकार और विपक्ष के बीच सीधी टक्कर का मंच बन सकता है। आगामी स्थानीय स्वराज्य संस्थाओं के चुनावों से पहले होने वाला यह अधिवेशन राजनीतिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राज्य के कई हिस्सों में अब तक अपेक्षित बारिश नहीं होने से कुछ बांधों का पानी ३१ अगस्त तक मुख्य रूप से पेयजल के लिए सुरक्षित रखने के पैâसले पर भी सवाल उठ रहे हैं। विपक्ष का आरोप है कि किसानों को राहत देने के बजाय सरकार केवल घोषणाएं कर रही है।
किसान कर्जमाफी का मुद्दा भी सदन में गूंज सकता है। विधानसभा चुनाव से पहले किए गए कर्जमाफी के वादों को लेकर विपक्ष लगातार सरकार पर निशाना साध रहा है। कांग्रेस, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) और शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) का आरोप है कि सरकार की घोषणाओं का लाभ अपेक्षित स्तर पर किसानों तक नहीं पहुंच पाया है।
मराठा आरक्षण का मुद्दा भी सरकार के लिए चुनौती बना हुआ है। मनोज जरांगे पाटील के आंदोलन, कुणबी प्रमाणपत्र, ऐतिहासिक दस्तावेजों और शिंदे समिति के कामकाज को लेकर विवाद अब भी जारी है। विपक्ष इस विषय पर सरकार से जवाब मांगने की तैयारी में है। इसी बीच विधान परिषद चुनावों के दौरान विभिन्न क्षेत्रों में उम्मीदवार चयन को लेकर सामने आई नाराजगी ने महायुति के भीतर सब कुछ ठीक नहीं होने के संकेत दिए हैं। विपक्ष इस मुद्दे को भी सरकार के खिलाफ इस्तेमाल करने की रणनीति बना रहा है। प्रस्तावित शक्तिपीठ महामार्ग परियोजना और भूमि अधिग्रहण का मामला भी अधिवेशन में गरमा सकता है। बेरोजगारी, संविदा भर्ती, प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और रोजगार सृजन की स्थिति को लेकर भी विपक्ष सरकार को कटघरे में खड़ा कर सकता है। युवाओं से जुड़े मुद्दों पर सदन में तीखी बहस होने की संभावना है।
इन मुद्दों पर घिर सकती है सरकार
मानसून सत्र में कमजोर बारिश, किसान संकट, कर्जमाफी, मराठा-ओबीसी आरक्षण, बेरोजगारी, संविदा भर्ती, प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों और शक्तिपीठ महामार्ग परियोजना जैसे मुद्दों पर विपक्ष महायुति सरकार को घेरने की रणनीति बना रहा है। इन विषयों पर सदन में तीखी बहस के आसार हैं।
