मुख्यपृष्ठसंपादकीयसंपादकीय : इजरायल-हमास शांति समझौता... प्रेसिडेंट ट्रंप के हसीन सपने!

संपादकीय : इजरायल-हमास शांति समझौता… प्रेसिडेंट ट्रंप के हसीन सपने!

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की है कि इजरायल और हमास के बीच शांति योजना के पहले चरण पर सहमति बन गई है। श्री ट्रंप ने यह भी कहा है कि यह घटना अभूतपूर्व और ऐतिहासिक है। गाजा में शांति स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा कदम भी है। अगर यह समझौता स्थाई होता है तो पिछले दो वर्षों से गाजा जिस भयानक युद्ध में जल रहा है, उसे देखते हुए यह वहां के लोगों के लिए एक बड़ी राहत कही जा सकती है। इन दो वर्षों में, इजरायल ने अस्पतालों और नन्हें बच्चों की परवाह किए बिना गाजा पट्टी में अमानवीय हमले किए हैं। इसमें सैकड़ों बच्चे मारे गए। युद्ध पीड़ितों के खाद्य भंडार को भी नष्ट कर दिया। इजरायल के हमले गाजा को पूरी तरह से नष्ट करने के एकमात्र इरादे से किए गए थे। इससे वहां के लोगों का जीवन बुरी तरह तहस-नहस हो गया। यह भले ही किसी हद तक हुआ हो, लेकिन हालात सुचारु रूप से चलने के लिए युद्ध का रुकना जरूरी था। अगर ट्रंप जिस समझौते की बात कर रहे हैं, वह सचमुच हो जाता है तो कहा जा सकता है कि गाजा में कुछ हद तक शांति शुरू हो गई है। गाजा में आम जनता भी राहत की सांस ले पाएगी, साथ ही हमास द्वारा बंधक बनाए गए इजरायली बंधक भी। क्योंकि पहले चरण के इस समझौते के अनुसार, हमास इजरायली
बंधकों को रिहा
करेगा, जबकि इजरायल अपने सैनिकों को गाजा से एक निश्चित सीमा तक वापस बुलाएगा। इजरायल दो साल से हमास द्वारा बंधक बनाए गए इजरायली बंधकों को छुड़ाने के लिए संघर्ष कर रहा है। पूरी गाजा पट्टी बमबार्डिंग से जलकर राख हो गई है। कई और तरीके भी आजमाए गए, लेकिन आज भी सौ से ज्यादा इजरायली महिलाएं, बच्चे और वरिष्ठ नागरिक हमास द्वारा बंधक बनाए गए हैं। दो साल के युद्ध और गाजा के बड़े हिस्से में अपने सैनिकों की तैनाती के बावजूद, नेतन्याहू इन बंधकों को मुक्त नहीं करा पाए हैं। यह मुद्दा उनके लिए ‘गले की हड्डी’ बन गया है। इसलिए नेतन्याहू के पास कुछ हद तक गाजा से अपनी सेना को पीछे हटाने और इन बंधकों को मुक्त कराने के अलावा कोई विकल्प नहीं था। शायद इसीलिए उन्होंने ट्रंप के दबाव के आगे घुटने टेक दिए। आज वे कह रहे हैं कि ‘यह इजरायल के लिए एक महान दिन है’ क्योंकि बंधकों की रिहाई से उनके गले की हड्डी निकलने वाली है। वहां हमास भी अब गाजा और उसके लोगों को युद्ध में झोंके नहीं रख सकता था। गाजा के कुछ हिस्सों से इजरायली सैनिकों की वापसी, बिजली, पानी, चिकित्सा जैसी जरूरी सेवाओं का प्रावधान और इजरायल के हमलों से तबाह हुए क्षेत्र का पुनर्निर्माण भी हमास की
सर्वोच्च प्राथमिकताएं
थीं। इन वजहों के चलते, ट्रंप जैसा कह रहे हैं, यह समझौता हुआ होगा। बेशक, कुछ महीने पहले ट्रंप ने इजरायल और हमास के बीच युद्धविराम भी करवाया था, लेकिन इजरायल ने अचानक गाजा पर हमले फिर से शुरू कर दिए। इस वजह से ट्रंप सीधे-सीधे अपने मुंह के बल गिर गए। अब फिर से खुद ट्रंप ने इजरायल और हमास के बीच युद्धविराम की घोषणा कर दी है। नोबेल शांति पुरस्कार का भूत इस समय ट्रंप के सिर पर बुरी तरह हावी है। इसी के लिए वे पूरा दम-खम लगाए हुए हैं। वे हर कहीं उठते-बैठते शेखी बघारते रहते हैं कि वे दुनिया के सभी युद्धों और संघर्षों को रोक रहे हैं और उनकी मध्यस्थता से युद्धविराम हो रहे हैं। वे दावा करते हैं कि उन्होंने पाकिस्तान के खिलाफ भारत के ‘ऑपरेशन सिंदूर’ या ईरान-इजरायल युद्ध को रोका और अब उन्होंने घोषणा की है कि इजरायल-हमास शांति समझौता उनकी मध्यस्थता के कारण ही संभव हुआ। हालांकि, शांति समझौते का यह पहला चरण कितना सफल होता है, यह कब तक चलेगा, योजना के अगले चरण कैसे लागू होंगे, युद्धोन्मादी इजरायल कब तक अपना धैर्य बनाए रखेगा, इन सवालों के जवाब आज किसी के पास नहीं हैं। अभी के लिए, फिलहाल प्रेसिडेंट ट्रंप महाशय ने स्वघोषित नोबेल पुरस्कार के अपने खयाली घोड़े और आगे दौड़ा दिए हैं, बस इतना ही!

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