– सवालों के घेरे में फडणवीस की ‘अर्क’
-आर्थिक मामलों का करेगी प्रबंधन
सामना संवाददाता/ मुंबई
राज्य की आर्थिक हालत पहले से ही डगमगाई हुई है। ९ लाख करोड़ रुपए का कर्ज है। सरकार की तिजोरी खाली हो गई है। कई योजनाओं के लिए ‘महायुति’ सरकार के पास पैसा नहीं है। इसकी वजह सरकारी भ्रष्टाचार है। इन तमाम धांधली को छिपाने के लिए अब फडणवीस-शिंदे सरकार ने एक कंपनी बना दी है, जिसका नाम ‘अर्क’ है। सरकार का दावा है कि यह कंपनी राज्य की संपत्तियों और कर्ज का पुनर्गठन करेगी, लेकिन विपक्ष का आरोप है कि यह सिर्फ फाइनेंस फ्रॉड (आर्थिक घोटाले) और कुप्रबंधन छुपाने की नई स्कीम है।
बता दें कि महाराष्ट्र की सैकड़ों सरकारी परियोजनाएं वर्षों से ठप पड़ी हैं। इसी तरह कई संपत्तियां भी निष्क्रिय पड़ी हैं। सरकार को इनसे कोई ठोस राजस्व नहीं मिल पा रहा। ऐसे में अब राज्य की निष्क्रिय संपत्तियां प्राइवेट स्टाइल में चलाने का अधिकार इस नई कंपनी को दिया गया है। सरकार के मुताबिक, यह कंपनी मालमत्ता और कर्ज प्रबंधन का काम करेगी, पुराने कर्जों की समीक्षा करेगी और नए निवेश लाने का मार्ग प्रशस्त करेगी। विपक्षी दलों का आरोप है कि राज्य की संपत्तियों का निजीकरण करने की तैयारी चल रही है।
कंपनी बोर्ड में आईएएस अधिकारी
वित्त विभाग के वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों को इस कंपनी के बोर्ड में शामिल किया गया है। लेकिन सवाल यह है कि जब सरकार खुद अपनी अर्थव्यवस्था संभाल नहीं पा रही तो एक नई कंपनी बनाकर क्या जादू कर लेगी? विपक्ष ने चेतावनी दी है कि यह निर्णय आने वाले दिनों में राज्य की सार्वजनिक संपत्तियों की नीलामी की दिशा में पहला कदम साबित हो सकता है। यहां स्थिरता के नाम पर लूट की जोरदार तैयारी है।
निजीकरण को बढ़ावा
विपक्ष का आरोप है कि सरकार अपनी खामियों को छुपाने के लिए ‘अर्क’ कंपनी को आगे करेगी और अब तक हुई तमाम जमीनों की बिक्री (घोटाले) का ठीकरा इस कंपनी पर फोड़ेगी। इस कंपनी की आड़ में सरकार अपने मनमुताबिक संस्थानों में निजीकरण को बढ़ावा दे सकेगी। साथ ही घाटे का हवाला देकर सरकार की तमाम जमीनों को बेचने का रास्ता साफ कर पाएगी। सरकार अपने आर्थिक कुप्रबंधन का ठीकरा असेसमेंट स्ट्रक्चरल रिफॉर्म के नाम पर धकेलेगी।
