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लोकतंत्र की मजबूती के लिए सर्वदलीय शिष्टमंडल का धावा… वोटर लिस्ट में घपलेबाजी… आयोग पर सवालों की बौछार!

-मुख्य चुनाव अधिकारी हुए निरुत्तर

-चर्चा अधूरी…आयोग ने मांगा समय, आज पुन: चर्चा

सामना संवाददाता / मुंबई

लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए कल सर्वदलीय शिष्टमंडल ने सीधे मंत्रालय में धावा बोला। शिष्टमंडल ने वोटर लिस्ट की गड़बड़ी और लुकाछिपी के खिलाफ मुख्य निर्वाचन अधिकारी एस. चोकलिंगम पर सवालों की बौछार कर दी। महाविकास आघाड़ी ने इस बात पर जोर दिया कि दोषपूर्ण वोटर लिस्ट का उपयोग स्थानीय निकायों के चुनाव के लिए नहीं किया जाना चाहिए। इसके साथ ही यह मांग की कि वोटर लिस्ट में से किन मतदाताओं के नाम हटाए गए और किन नए मतदाताओं के नाम जोड़े गए, इसकी जानकारी जनता तक पहुंचनी ही चाहिए। शिष्टमंडल के सवालों पर निरुत्तर हुए चोकलिंगम ने वोटर लिस्ट से संबंधित अधिकार राज्य निर्वाचन आयुक्त के पास होने का दावा करते हुए टालमटोल की। इसलिए चर्चा अधूरी रह गई। मुख्य निर्वाचन अधिकारी द्वारा समय मांगे जाने के कारण कल सुबह ११ बजे आयुक्त और चोकलिंगम दोनों की उपस्थिति में फिर से चर्चा होगी।

वीवीपैट का इस्तेमाल करो या चुनाव बैलेट पेपर पर कराओ! – उद्धव ठाकरे
शिवसेनापक्षप्रमुख उद्धव ठाकरे ने इस दौरान ईवीएम मशीन में वीवीपैट लगाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि मतदाता को यह जानने का अधिकार है कि उसने वास्तव में किसे और किस पार्टी को वोट दिया है। इसके लिए वीवीपैट लगाए ही जाने चाहिए। शिवसेनापक्षप्रमुख उद्धव ठाकरे ने इस दौरान मांग की कि अगर चुनाव आयोग मुंबई में, जहां वार्ड पद्धति ही नहीं है और वीवीपैट लगी हुई ईवीएम नहीं दे रहा है, तो मुंबई मनपा का चुनाव बैलेट पेपर पर कराओ।

मतदाता सूची को सबसे पहले दोषमुक्त करो! – राज ठाकरे
मनसे अध्यक्ष राज ठाकरे ने कहा कि आप विधानसभा के लिए उपयोग की गई वोटर लिस्ट को ही स्थानीय निकायों के चुनाव के लिए उपयोग करने वाले हैं। वह सूची ही दोषपूर्ण थी। उसमें काफी गड़बड़ी थी, यह सामने आने पर भी वही सूची वैâसे उपयोग की जा सकती है? उन्होंने यह मुद्दा उठाया कि पहले वोटर लिस्ट को दोषमुक्त करें, हटाए गए नामों की जानकारी मतदाताओं को दें।

आम आदमी का संदेह दूर करे चुनाव आयोग!
कल सर्वदलीय शिष्टमंडल ने राज्य चुनाव आयोग पर धावा बोलकर मुख्य चुनाव अधिकारी एस. चोकलिंगम से मुलाकात की। इस दौरान शिष्टमंडल ने उन्हें एक ज्ञापन दिया। इस ज्ञापन में कहा गया है कि २०२४ में हुए विधानसभा के आम चुनावों से और कुल मिलाकर चुनाव आयोग के कामकाज के बारे में राजनीतिक दलों से लेकर आम आदमी के मन में बहुत संदेह हैं। चुनाव आयोग को एक स्वायत्त संस्था माना जाता है। लेकिन वर्तमान चुनाव आयोग के कामकाज को देखने पर संदेह पैदा हो रहा है कि क्या वास्तव में चुनाव आयोग स्वायत्त है? इस ज्ञापन में छह प्रमुख प्रश्न उठाते हुए शिष्टमंडल ने उनके जवाब मिलने की भी अपेक्षा व्यक्त की।
बता दें कि सर्वदलीय शिष्टमंडल कल दोपहर मंत्रालय में मुख्य निर्वाचन अधिकारी एस. चोकलिंगम से मिला। इसमें राष्ट्रवादी कांग्रेस के अध्यक्ष शरद पवार, शिवसेनापक्षप्रमुख उद्धव ठाकरे, मनसे अध्यक्ष राज ठाकरे, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता बालासाहेब थोरात, शेतकरी कामगार पक्ष के जयंत पाटील, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के सुभाष लांडे, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के अजीत नवले, समाजवादी पक्ष के रईस शेख, कॉमरेड प्रकाश रेड्डी के साथ ही शिवसेना नेता, युवासेनाप्रमुख, विधायक आदित्य ठाकरे, शिवसेना नेता व सांसद अनिल देसाई, विधायक एड. अनिल परब, मिलिंद नार्वेकर, राष्ट्रवादी कांग्रेस के विधायक जयंत पाटील, प्रदेशाध्यक्ष शशिकांत शिंदे, मनसे के पूर्व विधायक नितीन सरदेसाई, मनसे के मुंबई अध्यक्ष संदीप देशपांडे और कॉ. प्रकाश रेड्डी शामिल थे। मंत्रालय की सातवीं मंजिल पर स्थित कॉन्प्रâेंस रूम में चोकलिंगम के साथ प्रतिनिधिमंडल की लगभग डेढ़ घंटे तक चर्चा हुई। सत्ताधारी पक्ष की ओर से इस बैठक में कोई भी उपस्थित नहीं था।

शिष्टमंडल के सवाल
हटाए गए मतदाताओं की सूची व कारण सार्वजनिक क्यों नहीं? आयोग यह जानकारी वेबसाइट पर दें। अक्टूबर २०२४ से जोड़े गए नए नामों की सूची अब तक जारी क्यों नहीं? क्या इसमें राजनीतिक दबाव है? जुलाई २०२५ के बाद १८ वर्ष के हुए मतदाता मतदान अधिकार से वंचित क्यों? दोहरी मतदाता पंजीयन पर कार्रवाई क्यों नहीं? ‘डी-डुप्लिकेशन’ प्रणाली लागू की जाए। मनपा चुनावों में वीवीपैट क्यों नहीं? चार साल में तैयारी क्यों नहीं हुई और मशीनें कहां हैं? यदि प्रभाग पद्धति में वीवीपैट संभव नहीं, तो यह प्रणाली ही रद्द की जाए।

चर्चा के मुख्य मुद्दे
मुख्य निर्वाचन अधिकारी के साथ प्रतिनिधिमंडल ने स्थानीय निकाय चुनावों हेतु उपयोग में लाई जा रही विधानसभा की मतदाता सूची पर विस्तृत चर्चा की। इस सूची में १ जुलाई २०२५ तक पंजीकृत मतदाता मतदान कर सकेंगे। प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि सूची में गंभीर त्रुटियां हैं। साढ़े १४ लाख अतिरिक्त मतदाता दर्ज हैं, कई के पते नहीं हैं, कुछ की आयु ११७ से १२३ वर्ष तक दिखाई गई है, एक ही घर में २००-२०० मतदाता दिखाए गए हैं, जबकि अनेक के घर क्रमांक शून्य हैं। चुनाव से पूर्व वोटर लिस्ट में सुधार और जनजागृति अनिवार्य होती है, परंतु इस बार सूची से हटाए गए मतदाताओं की जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई।

 

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