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मनपा का ‘तुगलकी फरमान’…  डॉक्टर-नर्स नहीं, सिर्फ तकनीशियन ही करें ईसीजी!

– यूनियन बोली, पहले पद भरो फिर आदेश दो

– रिक्त पदों से जूझ रहे अस्पतालों पर नई मुसीबत, मरीज सेवा पर मंडराया खतरा

सामना संवाददाता / मुंबई

मुंबई मनपा के नए आदेश ने अस्पतालों में हड़कंप मचा दिया है। इसमें सभी अस्पतालों को निर्देश दिया गया है कि अब मरीजों की ईसीजी डॉक्टर या नर्स नहीं, बल्कि केवल प्रशिक्षित ईसीजी तकनीशियन ही करें। हालांकि, म्युनिसिपल नर्सिंग एंड पैरामेडिकल स्टाफ यूनियन ने मनपा के इस निर्णय का कड़ा विरोध करते हुए कहा है कि जब तकनीशियन ही नहीं हैं तो आदेश लागू करना जमीनी हकीकत से कटे पैâसले जैसा है। नाइट शिफ्ट व आपातकालीन स्थितियों में ईसीजी करनेवाला कोई न होने से गंभीर मरीजों की जान खतरे में पड़ सकती है। ऐसे में यूनियन ने मनपा प्रशासन से स्पष्ट मांग की है कि पहले सभी रिक्त पदों की भर्ती पूरी करें, फिर ऐसे आदेश थोपो।
बता दें कि मनपा के प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक द्वारा जारी परिपत्र में स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि अब ईसीजी केवल तकनीशियन ही करेंगे। इससे बड़ी समस्या खड़ी हो सकती है। कारण यह है कि कई उपनगरीय अस्पतालों में केवल एक ही ईसीजी तकनीशियन है, जो केवल सुबह की शिफ्ट में काम करता है। कई अस्पतालों में तकनीशियन के पद खाली होने से मरीजों को बाहर जाकर ईसीजी कराने को कहा जाता है, लेकिन इमरजेंसी विभाग में नाइट शिफ्ट या छुट्टी के दिन गंभीर स्थिति में आने वाले मरीजों का ईसीजी डॉक्टर या नर्सें करती हैं, जब तकनीशियन मौजूद नहीं होते।
मरीजों पर असर पड़ने की संभावना
अब मनपा के नए परिपत्र के बाद यह स्पष्ट कर दिया गया है कि मरीज का ईसीजी केवल तकनीशियन ही कर सकते हैं। इसी के साथ ही अब डॉक्टर या नर्सें यह कार्य नहीं करेंगी। इससे मरीज सेवा पर असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है। क्योंकि यदि किसी मरीज की ईसीजी समय पर नहीं की गई, तो उसकी जिम्मेदारी तकनीशियन पर डाली जाएगी। इसी कारण म्युनिसिपल नर्सिंग एंड पैरामेडिकल स्टाफ यूनियन ने इसके विरोध में आक्रामक रुख अपनाया है।
तकनीशियनों पर काम का अतिरिक्त बोझ
यूनियन की सहायक महासचिव रंजना आठवले ने कहा है कि मुंबई मनपा के मेडिकल कॉलेजों में ईसीजी करने के लिए तीनों शिफ्टों में तीन तकनीशियन और सहायक तकनीशियन कार्यरत होते हैं। लेकिन उपनगरीय अस्पतालों में इन पदों की भारी कमी है। कुछ अस्पतालों में केवल तकनीशियन हैं, तो कुछ में केवल सहायक तकनीशियन का एक पद भरा हुआ है। इन पदों की रिक्तता का असर न केवल मरीज सेवा पर पड़ता है, बल्कि कार्यरत तकनीशियनों पर काम का अतिरिक्त बोझ भी बढ़ता है। इसलिए मुंबई मनपा को पहले तकनीशियन और सहायक तकनीशियन के रिक्त पदों को भरना चाहिए।

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मन पाखी