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तारापुर औद्योगिक क्षेत्र में मौत का तांडव… ५ साल में ४८ मजदूरों की मौत!

-९० से अधिक गंभीर रूप से घायल

राधेश्याम सिंह / पालघर

एशिया के सबसे बड़े औद्योगिक क्षेत्रों में गिने जानेवाले तारापुर औद्योगिक क्षेत्र में मौत का तांडव मचा हुआ है। हादसों की बढ़ती घटनाओं ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पिछले पांच वर्षों में यहां ९१ औद्योगिक दुर्घटनाएं हुर्इं, जिनमें ४८ कामगारों की मौत और ९० से अधिक गंभीर रूप से घायल हुए हैं।
बता दें कि तारापुर-बोईसर औद्योगिक क्षेत्र में कुल १,०४५ पंजीकृत कारखाने हैं, जिनमें अधिकांश रासायनिक, औषधि, वस्त्र और इस्पात उद्योग से जुड़े हैं। करीब दो लाख कामगार और अधिकारी यहां कार्यरत हैं। औद्योगिक प्रगति के साथ-साथ आग, गैस लीक और विस्फोट जैसी घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। औद्योगिक सुरक्षा व स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, हादसों के प्रमुख कारण मानवीय लापरवाही, यांत्रिक खराबी, गलत प्रशिक्षण और असुरक्षित कार्यपद्धतियां हैं। अब तक २४४ कारखानों पर कानूनी कार्रवाई की गई है, जबकि पालघर कार्यालय में अधिकारी एवं कर्मचारी की कमी के कारण निरीक्षण कार्य प्रभावित हो रहा है। पिछले दो वर्षों में १७ घातक हादसे दर्ज हुए हैं, जिनमें मृत कामगारों के परिवारों को ७०.२५ लाख मुआवजा और २९.२५ लाख आर्थिक सहायता प्रदान की गई है।
प्रमुख हादसे:
मेडली फार्मास्युटिकल्स (अगस्त २०२५) – ४ मृत, २ गंभीर, तारा नाइट्रेट कंपनी (जनवरी २०२०) – ७ मृत, ७ घायल, आरती ड्रग्स (मार्च २०१३) – ५ मृत, १८ घायल, रिस्पॉन्सिव कंपनी (३१ अक्टूबर २०२५) – मशीन खराबी से आग, ३ घायल। इसी तरह की और बहुत सी कंपनियां हैं, जिनमें कई लोगों की मौत और कई लोग घायल हुए हैं।

सुरक्षा नियमों का उल्लंघन करने वाले कारखानों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की जा रही है। पिछले दो वर्षों में १६ सुरक्षा प्रशिक्षण कार्यक्रम भी आयोजित किए गए हैं।’
-माधव तोटेवाड, सह-संचालक, औद्योगिक सुरक्षा व स्वास्थ्य विभाग, पालघर

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