सामना संवाददाता / उल्हासनगर
उल्हासनगर के टाउन हॉल में आयोजित उत्तरभारतीय प्रवेश कार्यक्रम भाजपा के लिए विवाद का कारण बन गया। बड़ी संख्या में उत्तरभारतीय कार्यकर्ता यह उम्मीद लेकर पहुंचे थे कि उनका प्रवेश भाजपा प्रदेश अध्यक्ष रविंद्र चव्हाण के हाथों होगा, लेकिन प्रदेश अध्यक्ष कार्यक्रम में नहीं पहुंचे, जिससे समर्थकों में गहरा असंतोष फैल गया। बताया जा रहा है कि कार्यक्रम की खराब व्यवस्था और वरिष्ठ नेताओं की अनदेखी ने पार्टी की अंदरूनी कलह को उजागर कर दिया।
कार्यक्रम में कई वरिष्ठ नेता जैसे पूर्व जिला अध्यक्ष प्रदीप राम चंदानी, महेश सुखरमानी, जमनू पुरसवानी, वहीं महासचिव अमर लुंड, लखी नाथानी, पूर्व नगरसेविका मीना आयलानी, व्यापारी एसोसिएशन शॉप कीपर के अध्य्क्ष दीपक छतलानी, अमित वाधवा, शेरी लुंड, कंचन अमर लुंड, मीना सोंडे, चार्ली परवानी, राजू जाग्यासी, रवि जाग्यासी, टोनी सिरवानी, पिंटू भटीजा, मनोज साधनानी, अवि पंजाबी, दीपा पंजाबी, संजय सिंह, राकेश पाठक, मनोहर खेमचंदानी और कपिल ओड़सूल जैसे कई वरिष्ठ कार्यकर्ता कार्यक्रम में पहुंचे ही नहीं, जबकि कुछ नेताओं को स्टेज पर पीछे बैठाया गया, जिससे नाराज होकर वे बीच कार्यक्रम में ही लौट गए। भाजपा के उत्तरभारतीय विंग के वरिष्ठ नेता चंद्रकांत मिश्र भी जनता के बीच बैठे नजर आए। उन्हें मंच पर बुलाया गया, लेकिन उन्होंने मंच साझा करने से इनकार कर दिया।
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि भाजपा में बढ़ती गुटबाजी और वरिष्ठ नेताओं की अनदेखी आने वाले मनपा चुनाव में पार्टी के लिए नुकसानदायक साबित हो सकती है। नाराज कार्यकर्ताओं ने साफ संकेत दिए हैं कि यदि जिला अध्यक्ष राजेश वाधरिया का यही रवैया जारी रहा तो कई वरिष्ठ चेहरे पार्टी से दूरी बना सकते हैं और इसका सीधा असर आगामी चुनावी नतीजों पर पड़ेगा।
