-वसई-विरार महानगरपालिका ने बनाई 87 अस्थाई हॉकर्स जोन
राधेश्याम सिंह / विरार
वसई-विरार शहर के नागरिकों के लिए आखिरकार राहत भरी खबर है। गंभीर अतिक्रमण और सड़कों पर फैले फेरीवालों की समस्या से जूझ रहे शहर में, वसई-विरार शहर महापालिका ने कई साल के लंबे इंतजार के बाद 87 स्थानों पर अस्थायी हॉकर्स जोन बनाने का अहम फैसला लिया है। इस निर्णय से शहर के व्यस्ततम इलाकों पर कुंडली मारे बैठे हॉकर्स को अब महानगरपालिका द्वारा निर्धारित स्थानों पर ही अपना कारोबार जमाना होगा। जिससे शहर की ट्रैफिक जाम की विकराल समस्या के अस्थायी रूप से हल होने की उम्मीद जगी है।
अतिक्रमण बना था ‘सिरदर्द’
पिछले कई वर्षों से वसई-विरार शहर में फेरीवालों की समस्या गंभीर रूप ले चुकी थी। महापालिका की सीमा के भीतर,चाहे कपड़े बेचने वाले हों, मोबाइल एक्सेसरीज वाले, सब्जी वाले या फल वाले-इन सबने मिलकर सड़कों, फुटपाथों और भीड़-भाड़ वाली जगहों पर अवैध रूप से अपनी दुकानें लगा रखी थीं। नागरिकों के लिए पैदल चलना भी दूभर हो गया था और परिवहन व्यवस्था पर जबरदस्त दबाव बन रहा था। महानगरपालिका द्वारा कोई नीतिगत फैसला न लिए जाने के कारण फेरीवाला नीति पिछले सात सालों से सिर्फ कागजों तक सीमित थी। अब फेरीवाला नीति तय हो गई है और 87 जोन बन गए हैं, तब शहर को दोहरी राहत मिलेगी। निर्धारित स्थानों पर हॉकर्स के बैठने से सड़कों और फुटपाथों पर अतिक्रमण कम होगा।
राज्य सरकार ने 2014 में ‘राष्ट्रीय हॉकर नीति’ लागू करने का आदेश दिया था। इसके तहत वसई-विरार महानगरपालिका ने बायोमेट्रिक पद्धति से सर्वेक्षण पूरा किया था, जिसमें 12,768 स्थायी हॉकर्स और 2,388 अस्थायी हॉकर्स पंजीकृत हुए थे।
सितंबर 2019 में आयोजित आम बैठक में फेरीवाला नीति का प्रस्ताव अनुमोदन के लिए रखा गया था। हालांकि, उस समय सत्ताधारी दल और विपक्ष के विरोध के कारण जोन निर्धारित करने का प्रस्ताव स्थगित कर दिया गया था। अब वसई-विरार के नागरिकों में उम्मीद जगी है कि अब उनके शहर की सड़कें अतिक्रमण मुक्त होंगी और उन्हें ट्रैफिक की समस्या से छुटकारा मिलेगा।
