-डाॅ. रवीन्द्र कुमार
एक हैडलाइन है सोहा अली खान बांद्रा में स्पॉट हुईं। मैं सोच रहा हूं कि क्या बांद्रा में उन्हें जाना नहीं चाहिए था ? और यदि जाना चाहिए था तो स्पॉट नहीं होना चाहिए था? स्पॉट तो वो होते हैं जो तेजी से ‘एक्सटिंक्ट’ हो रहे हैं या हो गए हैं। रिपोर्टर कहना क्या चाहता है? क्या ये कि सबसे पहले उसने सोहा जी को पहचान लिया और फोटो खींच लिया। मैं सोहा अली खान का फैन नहीं। अलबत्ता उनकी माँ का फैन जरूर रहा हूं। अब भी हूं। मेरा ये लेख दरअसल सोहा अली खान के बारे में नहीं उस पत्रकार के बारे में है जिसने सोहा अली खान को ‘स्पॉट’ किया वो भी बांद्रा में। इस पर कोई पुरस्कार तो बनता है।
क्या सोहा अली खान के फैन ये जानने में रुचि रखते होंगे कि वो आजकल कहाँ घूम-फिर रही हैं। या फिर उनके बांद्रा वाले फैन यह सुन कर सिर धुनेंगे कि लो सोहा अपुन के बांद्रा में आई और एक हम अभागे हैं जो न देख पाये, न सेल्फ़ी ले पाये। अब ऑटोग्राफ लेने का रिवाज तो खत्म सा ही हो गया। अब तो सीधे सेल्फ़ी का चलन है। क्या रिपोर्टर महोदय देश को ये बताना चाह रहे थे कि देखो सोहा भी हमारी-तुम्हारी तरह बांद्रा 11-40 की फास्ट लोकल लेकर जाती है। लेडीज कोच में भी सीट नहीं मिलती कितनी गर्दी है रे बाबा।
क्या सोहा को बांद्रा में जाना वर्जित है। यदि नहीं तो फिर ये खबर कैसे हुई ? हो सकता है वो जगह-जगह स्पॉट हो रही थीं। क्या कोलबा, क्या मीरा रोड, क्या नेरुल, क्या कल्याण। किंतु-परंतु वे बांद्रा में अभी तक स्पॉट नहीं हो पायी थीं। जैसे होता है न फलां बाघ, फलां मोर या फलां किस्म की बिल्ली जो भारत में दुर्लभ है वह बांद्रा में स्पॉट हो गयी। मैं समझता हूं कि अब सोहा जी ने तो कहा नहीं होगा कि मैं बांद्रा जा रही हूं वहां मिलना और ये हैडिंग देना ‘बांद्रा में स्पाॅट हुईं सोहा अली खान’ गोया कि चाँद जो बांद्रा में दिखाई नहीं दिया करता था वह दृष्टिगोचर हो गया है। अब बांद्रा के लोगों के ऊपर है कि वे इस राष्ट्रीय महत्व के समाचार/सूचना का कैसे उपयोग करते हैं।
बेचारे ग़रीब रिपोर्टर का काम था ज्यों की त्यों धर दीनी चदरिया। बांद्रा वालो ! अब तुम्हारी बारी है। ये रोज-रोजज़ नहीं होता कि बांद्रा में सोहा स्पॉट हो। अब वो स्पॉट हो गईं हैं और सदैव-सजग रिपोर्टर ने अपनी जान पर खेल कर यह समाचार आप तक पहुंचाया है। कहीं आपने कभी भी देखी है ऐसी ‘इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्टिंग’ ? अब वो दिन दूर नहीं जब मेरे भारत महान की रैंकिंग विश्व प्रेस फ़्रीडम में नंबर एक हो जाएगी। थैंक यू रिपोर्टर जी। थैंक यू सोहा जी! थैंक यू कुणाल जो आपने सोहा जी को बांद्रा में स्पॉट होने दिया। खेमू भाऊ संभाल के, अगला नंबर आपका लग सकता है। अब समय आ गया है कि आप भी कहीं सांताक्रूज, विले पार्ले या दादर में स्पॉट हो जायें। एक जोक है कि एक दोस्त दूसरे दोस्त से कह रहा था कि मैंने कल एक चीता को स्पॉट किया (आई स्पाॅट्ड ए चीता) दोस्त ने कहा चल झूठे ! चीता तो नैचुरली स्पाॅट्ड ही आते हैं) अब रिपोर्टर भी बेचारा क्या करे वह भी तो यही चाहता है कोई उसे स्पॉट करे ताकि जीवन में कुछ तरक्की कर सके। आखिर वो कब तक बांद्रा में सोहा को स्पॉट करता फिरेगा उसको भी हक़ है एक अदद अपना ए.सी. केबिन और अपने लिये डीसेंट पैकेज स्पॉट कर सके।
