राजेश विक्रांत
मुंबई महानगर के सुप्रसिद्ध कवि, कथाकार, गीतकार गजलकार, आलोचक तथा स्वर संगम फाउंडेशन के जरिए साहित्यिक कार्यक्रमों के पुरोधा ह्रदयेश मयंक का ताजातरीन कहानी संग्रह है ‘विरसे की कहानियां’। इसे न्यू वर्ल्ड पब्लिकेशन, इंद्रपुरी, नई दिल्ली ने प्रकाशित किया है। यह पुस्तक डॉ सोमनाथ चट्टोपाध्याय एवं डॉ गौरव मेहता व टीम को समर्पित की गई है।
इसमें कुल 25 कहानियां हैं- रेत पर बनते ढहते घरौंदे, लवंग वाले बाबा, आतिथ्य, प्रतिकार, एक रात का दर्द, किनारा, एक और रमदयालपुर, संताप, जमीन का एक टुकड़ा, शवों की दलाली, कुल गाथा, हथेली में जमी अठन्नी, कुम्हलाए अमलतास के फूल, शापग्रस्त, हवा में पुल, मधुबन की राधिका, स्मृतिदंश, संघर्ष की राह बरास्ते दगडया हनुमान, कद्दावर फकीर, कुछ भी रहा न शेष, अभिशप्त, सब के दिन बहुरें, वफादारी बेघर बार तथा घर।
मयंक जी आम आदमी के रचनाकार हैं। उनकी प्रकाशित कृतियां हैं-मैं शहर और सूरज (कविता संग्रह), सायरन से सन्नाटे तक (गीत संग्रह), युद्ध में शामिल नहीं थीं चिड़ियायें (कविता संग्रह), ठहराव के विरुद्ध (कविता संग्रह), अभी भी बचा हुआ है बहुत कुछ (कविता संग्रह), हम ये जो मिट्टी के बने हैं (कविता संग्रह), अपने हिस्से की धूप (गजल संग्रह), दिल से निकली दिल की बात (गजल संग्रह), रेत पर बनते ढहते घरौंदे (कहानी संग्रह), मुंबई का साहित्यिक परिदृश्य एक पुनरावलोकन (आलोचना), मेरी बस्ती में रोशनी है अभी (आलोचना), एक महक सोंधी माटी की (गीत नवगीत संग्रह) सिवान में बांसुरी (कविता संग्रह)।
मयंक की कहानियां सीधे, सरल, सच्चे पात्रों की दास्तान है जिसमें गांव, शहर, समाज, नजदीकी संबंध, रिश्तेदारी, अध्यापक, पंडित, विद्वान, कवि साहित्यकार आदि वास्तविकता के साथ मौजूद हैं। यहां तक कि उनकी एक कहानी ‘घर’ में एक कविता भी है। पुस्तक के बारे में मयंक जी कहते हैं कि इसमें कुछ स्मृतियां हैं, कुछ किस्से हैं व कुछ घटनाओं को कहानी की शक्ल में पिरोने की कोशिश की गई है। दरअसल, बचपन से कहने- सुनने का जो संस्कार मिला उसे जीवन भर जिलाये रखते हुए अगली पीढ़ी तक पहुंचाने के दायित्व का भी निर्वहन करना जरूरी है। शायद इसीलिए भी इस संग्रह को प्रस्तुत करने का मन हुआ।
‘विरसे की कहानियां’ में गांव के साथ मुंबई के जीवन का चित्रण भी बखूबी मिलता है। संग्रह की पहली कहानी ‘रेत पर बनते ढहते घरौंदे’ सुधीर व शर्मिष्ठा के जीवन संघर्ष की दास्तां है। एक ऐसी दास्तान जिससे आम मुंबईकरों का वास्ता रोज-रोज पड़ता है। दोनों का परिवार मूलतः है कोंकण इलाके का, पर गिरगांव की एक दो मंजिली चाल में रहता है। शर्मिष्ठा का परिवार पहली मंजिल पर तो सुधीर का तल मंजिल पर। दोनों की प्राथमिक शिक्षा एक ही स्कूल में होती है। वे चर्चगेट के के सी कॉलेज में भी साथ-साथ पढ़ते हैं। इस दौरान उन्हें प्रेम हो गया। शादी के बाद सुधीर व शर्मिष्ठा गोरेगांव में रहने लगे और एक संतान भी हो जाती है। यह एक सामान्य दंपति की कहानी है जिसमें संवेदनशीलता, गिरगांव चौपाटी, गणेशोत्सव की रौनक व परस्पर प्यार- मनुहार, रूठना- मनाना के साथ पति-पत्नी के रिश्तों में सर्वदा व्याप्त माफी का उल्लेख है। ‘एक रात का दर्द’ मुंबई महानगरपालिका में शिक्षक राजेश्वर सिंह की एक छत प्राप्त करने की जद्दोजहद तथा अपने लोगों के सहयोग से उस छत को प्राप्त करने की दास्तान दर्ज है। यह शहरी व्यवस्था में संघर्षरत बेघर आदमी की संघर्ष कथा है। ‘शवों की दलाली’ आज की क्रूर व्यवस्था का सच है तो ‘हवा में पुल’ भू माफिया के षडयंत्रों की कलई खोलती है। ‘संघर्ष की राह पर बरास्ते दगडया हनुमान’ धर्म को फायदे के लिए हथियार बनाने की कड़वी सच्चाई है। इसके अलावा उनकी कहानियों- ‘कुछ भी रहा न शेष’, ‘अभिशप्त’ तथा ‘बेघर- बार: में भी मुंबई का संघर्ष व मुंबई की भावना कायदे से नजर आती है। ‘लवंग वाले बाबा’ का राजन अपनों से प्रताड़ित है। एक दिन उसे पता चलता है कि उसके दोनों बेटों ने गांव की सारी संपत्ति व बैंक की रकम अपने नाम करवा लिए हैं तो राजन उसके कागज़ जला डालता है और सारी संपत्ति एक वृद्धाश्रम को दान कर देता है।
ग्रामीण जीवन में प्रतिरोध को रेखांकित कहानी ‘प्रतिकार’ गांव में आयें बदलावों की कहानी है तो ‘किनारा’ नन्हकी की कहानी है जिसे उसकी उजड़ी दुनिया एक बार फिर मिल जाती है। ‘संताप’ में जीवन के उतार चढ़ाव व संघर्षों का चित्रण मिलता है जबकि ‘कुल गाथा’ एक सुप्रसिद्ध पौराणिक लोक कथा को कहानी में रूपायित करती है। कोरोना काल में गांवों की ओर भागते आदमी के पश्चाताप व पुनः गांव के ललक की कहानी ‘जमीन का एक टुकड़ा’ आपको गांव की ओर ले जायेगी जहां आज भी बिछड़े लोगों को बसाने की लालसा लोगों में जीवित दिखेगी। ‘शापग्रस्त’ कहानी में रजिया के बहाने यह दर्ज है कि कुछ वर्षों में जीता जागता ऐश्वर्य से भरा घर कैसे अभिशप्त हो जाता है। ‘मधुबन की राधिका’ संबंधों को पुनः परिभाषित करने वाली कहानी है। कुल मिलाकर आम जन जीवन के सुख दुख की दास्तान है ‘विरसे की कहानियां’। 210 पृष्ठों की इस पुस्तक का मूल्य 399 रुपए है।
