-छत्रपति संभाजी महाराज उद्यान के लिए आरक्षित जमीन पर अवैध डंपिंग
तबेले वालों ने भी किया अतिक्रमण
सुरेश गोलानी / भायंदर
पर्यावरण और आरक्षित जमीनों के संरक्षण का ढोल पीटनेवाली मीरा-भायंदर महानगरपालिका के कागजी दावों और जमीनी हकीकत में भारी अंतर को दर्शाने वाला एक और मामला सामने आया है। भायंदर-पूर्व के नवघर इलाके में स्थित इंद्रलोक फेज-६ (सर्वे नंबर ३९, पुराना नंबर २४७) में धर्मवीर छत्रपति संभाजी महाराज उद्यान के लिए आरक्षित सरकारी जमीन पर अवैध रूप से सीमेंट-कंक्रीट (सीसी) के मलबे और कूड़े-कचरे की खुलेआम डंपिंग की जा रही है।
मंगलवार को भी एक टेंपो चालक द्वारा उक्त जमीन पर कूड़ा-कचरा डालने की जानकारी मिलते ही कुछ जागरूक नागरिकों ने इसकी शिकायत मनपा अधिकारियों से की। शिकायत का संज्ञान लेते हुए मनपा की एक टीम मौके पर पहुंची, लेकिन आरोप है कि उल्लंघनकर्ता टेंपो चालक और उसके मालिक के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने के बजाय ५,००० रुपए का दंड वसूलकर मामले को रफा-दफा कर दिया गया। ज्ञात हो कि सरकारी जमीन पर आरक्षण होने के कारण राजस्व विभाग ने इसे अतिक्रमण से सुरक्षित रखने तथा जनहित की सुविधाओं का विकास करने के उद्देश्य से मनपा को हस्तांतरित किया था। मनपा ने इस जमीन पर छत्रपति संभाजी महाराज उद्यान के विकास का कार्य शुरू किया था, लेकिन सूत्रों के अनुसार, धन की कमी के कारण यह कार्य फिलहाल रोक दिया गया है। इसी का फायदा उठाकर मलबा माफिया बेखौफ होकर इस जमीन पर अवैध डंपिंग कर रहे हैं। इसके अलावा कुछ असामाजिक तत्वों ने इस जमीन के एक हिस्से पर अवैध कब्जा कर उसे तबेले वालों को किराए पर दे दिया है। नागरिकों का यह भी आरोप है कि अवैध रूप से कचरा और मलबा डंपिंग करने के अलावा इस जमीन का इस्तेमाल खुले में शौच के लिए भी किया जा रहा है।
पर्यावरणीय नियमों का उल्लंघन
पर्यावरणीय नियमों के तहत गंभीर उल्लंघन होने के बावजूद कार्रवाई के नाम पर मनपा द्वारा मात्र मामूली दंड लेकर उल्लंघनकर्ताओं और उनके वाहनों को छोड़ देना न केवल इन अवैध गतिविधियों को बढ़ावा देने जैसा है, बल्कि धर्मवीर छत्रपति संभाजी महाराज के नाम से आरक्षित इस भूमि की गरिमा को भी ठेस पहुंचाता है। गौरतलब है कि मनपा और राजस्व विभाग की अनदेखी तथा निष्क्रियता के कारण मलबा माफियाओं ने शहर के पर्यावरण-संवेदनशील क्षेत्रों, जैसे मैंग्रोव बेल्ट, खाड़ियों, छोटी नदियों, आर्द्रभूमि (वेटलैंड), तटीय विनियमन क्षेत्र (कोस्टल रेगुलेशन जोन-सीआरजेड) तथा नालों को बेखौफ निशाना बनाना जारी रखा है।
