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बाणगंगा के नायक रॉकी क्रास्टो नहीं रहे

सामना संवाददाता / मुंबई

मुंबई के सुप्रसिद्ध बाणगंगा क्षेत्र की पहचान और विरासत को संजोने में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले पूर्व नगरसेवक रॉकी क्रास्टो का हाल ही में निधन हो गया है। रॉकी क्रास्टो को बाणगंगा का सच्चा प्रहरी और संरक्षक माना जाता था। उन्होंने अपने जीवन के पांच दशकों से अधिक समय तक बाणगंगा क्षेत्र की स्वच्छता, संरक्षण और सांस्कृतिक विरासत को बचाने के लिए अथक प्रयास किए।

स्थानीय लोगों के अनुसार, उनका बाणगंगा से भावनात्मक जुड़ाव युवावस्था से ही था। वे न केवल इसके संरक्षण के लिए सक्रिय रहे, बल्कि कई मौकों पर लोगों की मदद करने और जान बचाने के लिए भी आगे आए। बताया जाता है कि 1970 और 1980 के दशक में, जब बाणगंगा क्षेत्र उपेक्षा और गंदगी का शिकार हो रहा था, तब रॉकी क्रास्टो ने स्वयं आगे बढ़कर इसके सफाई अभियान का नेतृत्व किया। उनके प्रयासों से यह ऐतिहासिक धरोहर पुन अपनी गरिमा की ओर अग्रसर हुई।

वे पांच बार मुंबई महानगरपालिका में कॉरपोरेटर रहे। रॉकी क्रास्टो का सामाजिक सरोकारों से गहरा नाता था। उनका जीवन समाजसेवा, समर्पण और विरासत संरक्षण का प्रेरक उदाहरण रहा है।

उनके निधन से सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्र में शोक की लहर है। वे राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के सचिव एवं प्रवक्ता क्लाइड क्रास्टो के पिता थे। उनके निधन पर विभिन्न सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक संगठनों ने गहरा शोक व्यक्त किया है। अनेक जाने माने लोगों और आम लोगों ने उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि रॉकी क्रास्टो का योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा।

उनके निधन से न केवल उनके परिवार, बल्कि पूरे बाणगंगा क्षेत्र ने अपना एक सच्चा हितैषी खो दिया है।

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