मुख्यपृष्ठग्लैमर“किरदार दिल से जुड़े, तभी उसे सजीव कर पाता हूँ”: तरुण खन्ना

“किरदार दिल से जुड़े, तभी उसे सजीव कर पाता हूँ”: तरुण खन्ना

हिमांशु राज

कर्मफल दाता शनि, राधा कृष्ण, जय कन्हैया लाल की, देवी आदि पराशक्ति, कथा विश्वास के इतिहास की, संतोषी मां और परम अवतार श्री कृष्ण जैसे धारावाहिकों में यादगार भूमिकाएं निभाने वाले अभिनेता तरुण खन्ना का कहना है कि अभिनय का कोई निश्चित तरीका नहीं होता। वे किरदार से दिल का गहरा जुड़ाव ही सबसे सच्चा रास्ता मानते हैं।

वे बताते हैं, “किरदार निभाने का एक ही तरीका नहीं होता। मैं अलग अलग तरीके आजमाता हूँ, लेकिन सबसे बड़ा काम है दिल की सुनना। दिल से जुड़ाव हो, तभी अभिनय असली लगता है। कभी शरीर की बनावट बदलनी पड़ती है, तो कभी आवाज या चलने का ढंग। मैं रोज अभ्यास करता हूँ ताकि हमेशा तैयार रहूं। लोगों की नकल करना भी अच्छा अभ्यास है, इससे बहुत फायदा होता है।”

तरुण किसी तयशुदा अभिनय विधि पर भरोसा नहीं करते। वे कहते हैं, “मैंने बहुत कुछ पढ़ा है, लेकिन किसी का अंधानुकरण नहीं करता। मैंने अपना तरीका बनाया है—किरदार का पृष्ठभूमि, उसकी पढ़ाई, स्वभाव और रिश्तों को समझना। वह आक्रामक है या नरम, दूसरों के साथ उसका व्यवहार कैसा है—ये सभी बातें किरदार को आकार देती हैं।”

विधियां भले कम असर डालती हों, लेकिन अमिताभ बच्चन, नाना पाटेकर, अशुतोष राणा, दिलीप कुमार, नसीरुद्दीन शाह, इरफान खान और मनोज बाजपेयी जैसे दिग्गजों ने उन्हें प्रेरित किया है।

दो दशक से अधिक समय से इंडस्ट्री में सक्रिय रहने के बाद अभिनय उनकी रग रग में बस गया है। वे मुस्कुराते हुए कहते हैं, “स्क्रिप्ट पढ़ते ही रोल की मांग समझ आ जाती है।”

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