गड्ढों, जाम और अधूरी सड़कों ने बढ़ाई मुंबईकरों की मुश्किलें
द्रुप्ति झा / मुंबई
देश की आर्थिक राजधानी और कभी ‘न रुकने वाले शहर’ के नाम से मशहूर मुंबई की रफ्तार इन दिनों थम सी गई है। बारिश आने से पहले ही शहर की सड़कें गड्ढों, धूल और ट्रैफिक जाम की गिरफ्त में आ चुकी हैं। हालात ऐसे हो गए हैं कि रोजाना लाखों मुंबईकर घंटों सड़क पर फंसने को मजबूर हैं। ऑफिस पहुंचने का समय दोगुना-तिगुना हो गया है, जबकि ईंधन और समय दोनों की भारी बर्बादी हो रही है।
मुंबई महानगरपालिका की ओर से हर साल सड़कों के कंक्रीटीकरण और प्री-मानसून तैयारियों के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी तस्वीर बिल्कुल अलग नजर आ रही है। शहर के कई हिस्सों में अधूरी सड़कें और अनियोजित निर्माण कार्य लोगों के लिए मुसीबत बन गए हैं। मेट्रो और अन्य इंप्रâास्ट्रक्चर परियोजनाओं के कारण मुंबई के कई इलाके खुदे पड़े हैं।
सबसे खराब स्थिति अंधेरी और जोगेश्वरी इलाके की बताई जा रही है। लिंक रोड और स्वामी विवेकानंद रोड पर वाहन रेंगते नजर आ रहे हैं। पैचवर्क की गुणवत्ता इतनी खराब है कि हल्की बारिश से ही सड़कें फिर उखड़ने लगी हैं। जगह-जगह बने गड्ढों ने दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ा दिया है। दैनिक यात्री प्रवीण सावंत ने नाराजगी जताते हुए कहा, ‘पहले ऑफिस पहुंचने में ४५ मिनट लगते थे, अब ढाई से तीन घंटे लग रहे हैं। आधी जिंदगी ट्रैफिक में फंसकर गुजर रही है।’ मानसून से पहले ही मुंबई की यह हालत प्रशासनिक तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है।
ट्रैफिक में फंसकर बढ़ रहा तनाव
मुंबई की सड़कों पर बढ़ते गड्ढों और जाम ने आम लोगों की मुश्किलें कई गुना बढ़ा दी हैं। ऑफिस जाने वाले यात्रियों का रोजाना घंटों समय ट्रैफिक में बर्बाद हो रहा है। खराब सड़कों के कारण ईंधन खर्च बढ़ने के साथ दुर्घटनाओं का खतरा भी लगातार गहरा रहा है।
