द्रुप्ति झा / मुंबई
इन दिनों मुंबई में बेस्ट की बसों में आग लगने की घटनाएं काफी बढ़ती जा रही हैं। ऐसे में यात्रियों का कहना है कि अब इन बसों में बैठने में डर लगता है कि पता नहीं कब, कौन-सी बस जलने लगे। मगर इस पूरे मामले पर बेस्ट प्रशासन का रवैया पूरी तरह बेबाक और उदासीन बना हुआ है।
बेस्ट डिपो में खड़ी बसों में भी लगातार आग लगने की घटनाएं सामने आ रही हैं। बेस्ट बसों की सुरक्षा व्यवस्था पर अब गंभीर सवाल उठने लगे हैं। पिछले कुछ महीनों में मुंबई के अलग-अलग इलाकों में बेस्ट बसों में आग लगने या इंजन से धुआं निकलने की कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं। गनीमत रही कि ज्यादातर हादसों में यात्रियों को समय रहते सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया, लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है?
सांताक्रुज डिपो में मंगलवार तड़के एक बेस्ट बस में आग लग गई। बताया जा रहा है कि र्इंधन भरने के लिए बस को ले जाते समय चालक के केबिन में शॉर्ट सर्किट हो गया था। हालांकि, कर्मचारियों ने अग्निशामक यंत्रों का इस्तेमाल किया और दमकलकर्मियों ने आग पर काबू पाया।
इससे पहले हाल ही में मुंबई के सायन इलाके में स्थित प्रतीक्षा नगर डिपो में रविवार और सोमवार की दरमियानी रात को दो बेस्ट बसें अलग-अलग आग की घटनाओं में जलकर पूरी तरह से खाक हो गई थीं। गनीमत रही कि इस हादसे में गाड़ियां खाली खड़ी थीं, जिससे किसी भी व्यक्ति के जलने की खबर सामने नहीं आई थी। इन घटनाओं में प्राथमिक स्तर पर आग लगने की वजह शॉर्ट सर्किट और इंजन का ओवरहीटिंग बताया गया था।
आग लगने के कारण
विशेषज्ञों और यात्री संगठनों के मुताबिक, इस लापरवाही के पीछे मुख्य रूप से तीन बड़े कारण हैं। खराब मेंटेनेंस जहां पर बसों की समय पर सर्विसिंग न होना और घटिया स्पेयर पार्ट्स का इस्तेमाल करना है। बेस्ट के बेड़े में शामिल कई बसें प्राइवेट ऑपरेटरों की हैं। आरोप है कि ये ऑपरेटर मुनाफे के चक्कर में बसों के रखरखाव पर ध्यान नहीं देते।
जान की कीमत नहीं
दादर निवासी रमेश सावंत ने कहा कि हम रोज बेस्ट से सफर करते हैं, क्योंकि यह सस्ती और सुलभ है। लेकिन अब बस में बैठते ही डर लगता है कि कहीं इंजन से धुआं न निकलने लगे। प्रशासन के लिए हमारी जान की कोई कीमत नहीं है।
