मुख्यपृष्ठस्तंभनिवेश गुरु: ‘समय को खर्च कर रहे हैं या निवेश?’

निवेश गुरु: ‘समय को खर्च कर रहे हैं या निवेश?’

भरतकुमार सोलंकी / मुंबई

पश्चिम की तुलना में पूर्व में सूरज जल्दी उगता है। कहीं-कहीं तो दिन की शुरुआत १२-१३ घंटे पहले हो जाती है। यानी मुंबई में जब सुबह होती है, तब सिएटल और न्यू यॉर्क जैसे शहरों में पिछली रात चल रही होती है। लेकिन सवाल यह है कि क्या सिर्फ सूरज जल्दी उगने से कोई व्यक्ति या समाज सफल हो जाता है? या फिर असली फर्क इस बात से पड़ता है कि हम अपने समय का उपयोग कैसे करते हैं?
मुंबई की सुबह का दृश्य देखिए। लोग ऐसे भागते दिखाई देते हैं जैसे जिंदगी की आखिरी ट्रेन छूटने वाली हो। कोई सिग्नल पर खड़ी कार का लगातार हॉर्न बजा रहा है, कोई बाइक लेकर फुटपाथ पर चढ़ गया है, तो कोई ट्रेन पकड़ने के लिए जान जोखिम में डाल रहा है। सवाल यह है कि क्या सच में इतनी जल्दी जरूरी थी? अगर एक घंटा पहले घर से निकलते तो क्या दुनिया रुक जाती?
असल समस्या समय की कमी नहीं, बल्कि टाइम मैनेजमेंट की कमी है। निवेश की भाषा में समझें तो पैसा और समय दोनों पूंजी हैं। फर्क सिर्फ इतना है कि पैसा खोकर दोबारा कमाया जा सकता है, लेकिन समय एक बार निकल जाए तो कभी वापस नहीं आता। फिर भी लोग पैसों के निवेश पर घंटों चर्चा करेंगे, लेकिन समय के निवेश पर नहीं। क्या आपने गौर किया है कि जो व्यक्ति हर समय भागता रहता है, वह मानसिक रूप से सबसे अधिक असंतुलित दिखाई देता है? सुबह से ही तनाव, गुस्सा, हॉर्न, गालियां और जल्दबाजी-क्या यही सफल जीवन का संकेत है? और सबसे बड़ा सवाल-इतनी भागदौड़ के बाद भी क्या जिंदगी के सारे काम पूरे हो जाते हैं?
सच्चाई यह है कि अधिकांश लोग जिंदगी भर दौड़ते रहते हैं, लेकिन कहीं पहुंचते नहीं। क्योंकि उन्होंने समय को ‘निवेश’ की तरह नहीं, बल्कि ‘खर्च’ की तरह उपयोग किया। बड़ी कंपनियां समय का महत्व अच्छी तरह समझती हैं। वे हर कार्य के लिए सिस्टम, प्लानिंग और शेड्यूल बनाती हैं। क्योंकि उन्हें पता है कि बिना अनुशासन के पूंजी भी नष्ट होती है और समय भी। ठीक इसी तरह व्यक्ति को भी अपनी दिनचर्या व्यवस्थित करनी होगी। जल्दी उठना, समय पर निकलना, कामों की प्राथमिकता तय करना और मानसिक शांति बनाए रखना-ये केवल आदतें नहीं, बल्कि ‘टाइम इन्वेस्टमेंट स्ट्रेटेजी’ हैं। जरा सोचिए-यदि रोज की जल्दबाजी, तनाव और अव्यवस्था में बर्बाद होने वाला केवल एक घंटा आप स्वास्थ्य, पढ़ाई, परिवार, ध्यान या निवेश योजना बनाने में लगाएं, तो दस वर्षों में उसका परिणाम कितना बड़ा हो सकता है? आज लोग करोड़ों रुपए के निवेश की योजना बनाते हैं, लेकिन अपने २४ घंटे की योजना नहीं बनाते। जबकि सबसे बड़ा निवेश वही है जो आपकी जिंदगी की गुणवत्ता बढ़ाए। इसलिए अगली बार जब आप सड़क पर हॉर्न बजाते हुए भाग रहे हों, तो खुद से एक सवाल जरूर पूछिए- क्या मैं समय बचा रहा हूं या अपनी जिंदगी को बिना योजना के खर्च कर रहा हूं? क्योंकि अंत में सफल वही होता है, जो केवल पैसे का नहीं,
समय का भी निवेश करना सीख जाता है।
(लेखक आर्थिक निवेश मामलों के विशेषज्ञ हैं)

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