– संबोधन के दौरान अटकते नजर आए पीएम, देखने पड़े पेपर नोट्स
-विपक्ष बोला, मोदी के व्यवहार से झलकी आत्मविश्वास की कमी
सामना संवाददाता / नई दिल्ली
लाल किले से स्वतंत्रता दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण का एक हिस्सा अब सियासी घमासान का कारण बन गया है। बायो-इकोनॉमी पर बोलते समय प्रधानमंत्री कुछ क्षणों के लिए अटकते नजर आए और उन्हें अपने पेपर नोट्स देखने पड़े। इसके बाद विपक्ष ने इस वीडियो को सोशल मीडिया पर शेयर करते हुए प्रधानमंत्री की भाषण शैली पर सवाल उठाए।
आम आदमी पार्टी के अध्यक्ष और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने १५ अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के भाषण के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आलोचना करते हुए उन्हें `कम आत्मविश्वास वाला, घबराया हुआ और डगमगाता हुआ प्रधानमंत्री’ बताया। केजरीवाल ने लाल किले पर मोदी के भाषण का एक वीडियो क्लिप शेयर किया, जिसमें २०१४ के बाद से भारत के बायो-इकोनॉमी सेक्टर में हुई प्रगति पर प्रधानमंत्री की बातों को दिखाया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि भाषण के दौरान मोदी के व्यवहार से आत्मविश्वास की कमी झलक रही थी। वहीं, कांग्रेस के सीनियर नेता जयराम रमेश ने मोदी के भाषण को राज्य विधानसभाओं और लोकसभा में महिलाओं के लिए आरक्षण की बेईमानी भरी बात बताया। रमेश ने याद दिलाया कि `नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के नाम से जाना जाने वाला महिला आरक्षण बिल सितंबर २०२३ में संसद से सर्वसम्मति से पास हुआ था, लेकिन उन्होंने २०२४ के लोकसभा चुनावों के लिए इसे लागू न करने पर केंद्र सरकार की आलोचना की।
चार साल में सबसे छोटा स्वतंत्रता दिवस भाषण
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बार करीब ७५ मिनट तक स्वतंत्रता दिवस भाषण दिया। यह पिछले चार साल में उनका सबसे छोटा स्वतंत्रता दिवस संबोधन रहा। इससे पहले २०२३ में पीएम मोदी ने करीब ९० मिनट तक देश को संबोधित किया था।
‘महिला आरक्षण पर मोदी की बात बेईमानी भरी!’
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने `एक्स’ पर लिखा कि प्रधानमंत्री ने आज लाल किले पर अपने भाषण में महिलाओं के आरक्षण के लिए बेईमानी भरी बात कही। उन्हें पता होना चाहिए कि संसद ने सितंबर २०२३ में `नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ को सर्वसम्मति से पास किया था, लेकिन मोदी सरकार के दोहरेपन और पाखंड के कारण ही यह पक्का किया गया कि यह २०२४ के चुनावों से लागू न हो पाए।
