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गणेशोत्सव से पहले भक्तों की बढ़ीं मुश्किलें

-पीओपी मूर्तियों के विसर्जन पर हाईकोर्ट का अंतिम फैसला बाकी
-६ फीट से अधिक ऊंची पीओपी गणेश मूर्तियों के विसर्जन पर रोक बरकरार
-गणेशोत्सव मंडलों की निगाहें अब अंतिम फैसले पर

-भक्तों के सामने भी बढ़ा असमंजस
गणेशोत्सव के दौरान लाखों भक्त पारंपरिक रूप से समुद्र और अन्य प्राकृतिक जलस्रोतों में गणेश मूर्तियों का विसर्जन करते हैं। ऐसे में अंतिम फैसला आने में देरी होने पर विसर्जन व्यवस्था को लेकर भक्तों के बीच भी असमंजस पैदा हो सकता है। अब राज्य सरकार, मनपा प्रशासन, गणेशोत्सव मंडलों और मूर्तिकारों के साथ-साथ भक्तों की निगाहें भी हाईकोर्ट के अंतिम फैसले पर टिकी हैं।

सामना संवाददाता / मुंबई
गणेशोत्सव की तैयारियां शुरू होने के बीच मुंबई और महाराष्ट्र के गणेशभक्तों के सामने एक बड़ी चिंता खड़ी हो गई है। छह फीट और उससे अधिक ऊंचाई वाली पीओपी गणेश मूर्तियों के प्राकृतिक जलस्रोतों में विसर्जन को लेकर मुंबई हाई कोर्ट ने शुक्रवार को अपना पैâसला सुरक्षित रख लिया। हालांकि, अंतिम पैâसला आने तक ९ जून २०२५ को जारी अंतरिम आदेश प्रभावी रहेगा। यानी अदालत की अनुमति के बिना निर्धारित श्रेणी की पीओपी मूर्तियों का समुद्र, नदी और तालाब जैसे प्राकृतिक जलस्रोतों में विसर्जन नहीं किया जा सकेगा।
इस मामले में रोहित जोशी की ओर से जनहित याचिका दायर की गई है। याचिका में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पीओपी मूर्तियों के विसर्जन संबंधी दिशा-निर्देशों को सख्ती से लागू करने तथा छह फीट और उससे अधिक ऊंचाई वाली पीओपी मूर्तियों के प्राकृतिक जलस्रोतों में विसर्जन की अनुमति देने वाले राज्य सरकार के पिछले वर्ष के निर्णय को रद्द करने की मांग की गई है।
याचिकाकर्ता, राज्य सरकार, मूर्तिकार संघों और गणेशोत्सव मंडलों का पक्ष सुनने के बाद न्यायमूर्ति अजय गडकरी और न्यायमूर्ति कमल खाता की खंडपीठ ने पैâसला सुरक्षित रखा है। हालांकि, अदालत अपना अंतिम पैâसला कब सुनाएगी, इसकी तारीख फिलहाल स्पष्ट नहीं है। ऐसे में गणेशोत्सव मंडलों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि उत्सव और विसर्जन से पहले पैâसला नहीं आया तो पीओपी मूर्तियों के विसर्जन की प्रक्रिया किस तरह आगे बढ़ेगी।
मंडलों और मूर्तिकारों की बढ़ी चिंता
अंतरिम आदेश कायम रहने से गणेशोत्सव मंडलों की तैयारियों पर भी असर पड़ने की आशंका है। बड़े आकार की पीओपी मूर्तियों के विसर्जन को लेकर मंडलों को प्रशासनिक अनुमति और अदालत के अगले आदेश का इंतजार करना पड़ सकता है। दूसरी ओर, मूर्तिकारों के लिए भी यह मुद्दा अहम है, क्योंकि बड़े आकार की पीओपी मूर्तियों के निर्माण और विसर्जन को लेकर नियमों की स्थिति स्पष्ट होना जरूरी है।

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