मुख्यपृष्ठस्तंभतरकश : बेतुके दावों पर अखंड भरोसे का ट्रिक

तरकश : बेतुके दावों पर अखंड भरोसे का ट्रिक

धनुर्धर

अद्भुत, अकल्पनीय, अभूतपूर्व… आप समझ ही गए होंगे कि बात यहां मोदी जी की हो रही है। प्रधानमंत्री तो बहुत हुए हैं देश में, लेकिन मोदी जैसा कोई नहीं। अब तक तो नहीं ही हुआ है, आगे भी कभी कोई उनके जैसा नहीं होगा। जी, आपके मन में संदेह हो रहा होगा इस दावे को लेकर, लेकिन हमारे मन में कोई संदेह नहीं है। किसी भी मोदी भक्त के मन में ऐसा कोई संदेह नहीं होगा। हो ही नहीं सकता।
अचूक फॉर्मूला
संदेह सिर्फ विरोधियों के मन में होता है। वह भी इसलिए क्योंकि उन्हें ऐसे बेतुके दावों पर अखंड भरोसा बनाए रखने का ट्रिक नहीं पता। यह ट्रिक हमें मिलनेवाली ट्रेनिंग का अहम हिस्सा है। बल्कि देखा जाए तो यह सच्चा समर्थक बनने की लंबी यात्रा का पहला कदम है। इसमें हमें समझाया जाता है कि इस ट्रिक के तीन अहम हिस्से हैं। उन्हें तीन फॉर्मूलों के रूप में समझना चाहिए।
फॉर्मूला नंबर १- नेता और संगठन जो कुछ भी कहे वह सच होता है।
फॉर्मूला नंबर २ – सच के रूप बदलते रहते हैं, इसलिए नेता और संगठन के दावे भी बदलते रह सकते हैं। जब भी कोई संदेह हो तो फॉर्मूला नंबर १ पर टिके रहें।
फॉर्मूला नंबर ३ – सच वही होता है जो हम मानते हैं। इसलिए नेता और संगठन की बातों से अलग कोई भी बात हो, वह चाहे कितनी भी सही लगे, उसे कभी मानो ही मत। न मानने से बड़े से बड़ा सच भी धीरे-धीरे गायब हो जाता है।
खोट निकालेंगे
तो अगर आपको लगता है कि कभी मोदी जी से भी बड़ा कोई पीएम इस देश में हुआ था या कभी भविष्य में हो सकता है तो आप मानते रहें, हम उस बात को स्वीकार ही नहीं करेंगे। आप नेहरू की बात करोगे, हम उसे मुसलमान बता देंगे। आप इंदिरा को लाओगे, हम तानाशाही का मुद्दा उठा देंगे। भविष्य तो वैसे भी किसी ने नहीं देखा है। तो जो भी कोई अच्छा पीएम हुआ, हम उसमें कोई न कोई खोट निकाल देंगे।
सच के रूप
लेकिन जरा ठहरें। हम अभी वर्तमान में हैं और यहीं रहेंगे। वर्तमान में रहते हुए ही हम भविष्य की बात करेंगे। क्योंकि अभी हमारे नेता मोदी जी हैं। कल को अगर कोई और हमारे नेता हो गए तो जरा इन फॉर्मूलों पर ध्यान दें। हमें इनके मुताबिक, उन्हीं बातों को सच मानना होगा जो उस समय का हमारा नेता कहेगा। ऊपर बताया गया है न कि फॉर्मूला नंबर २ में सच के रूप बदलते रहते हैं तो तब का सच चाहे जो भी हो, आज का सच यह है कि मोदी जैसा कोई न तो हुआ है और न होगा।
कैबिनेट बैठक
और आज की बात करें तो यह सच साबित करने के लिए तथ्यों की कोई कमी नहीं है। यही देखिए के देश में बढ़ती गर्मी के मद्देनजर मोदी जी ने बाकायदा कैबिनेट की मीटिंग बुलाकर यह सलाह दी कि ज्यादा पानी पिया करें और जरूरी न हो तो धूप में घर से न निकलें। समर्थक तो इस अद्भुत, अकल्पनीय, अभूतपूर्व सलाह पर लहालोट थे ही हमेशा की तरह, लेकिन विरोधियों ने सवाल खड़ा किया कि ऐसी सलाह हर घर में बूढ़े-बुजुर्ग हर घंटे देते रहते हैं। पर मुद्दा तो पीएम की सलाह का है। क्या आज तक देश के किसी पीएम ने कैबिनेट की मीटिंग बुलाकर ऐसी सलाह दी अपने मंत्रियों को और देशवासियों को? नहीं दी न, बस बात खत्म।
एयरफोर्स की एंट्री
और यही नहीं, मोदी जी ऐसे तरह-तरह के कामों अंजाम देते रहते हैं। विरोधीगण परीक्षाओं के पेपर लीक होने की बात करते हैं, लेकिन यह नहीं बताते कि क्या अब तक देश में कोई पीएम हुआ था ऐसा, जो साल-दर-साल परीक्षा पर चर्चा करता रहा हो। यह भी तो देखिए कि इतिहास में पहली बार किसी सरकार ने यह फैसला किया कि परीक्षा के पर्चे पहुंचाने का काम एयरफोर्स के जरिए करवाया जाएगा।
देशभक्ति पर सवाल
परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता बहाल करने का ऐसा अनोखा उपाय क्या सामान्य बुद्धि वाले किसी पीएम की सरकार निकाल सकती थी? अब तो परीक्षा के पेपर लीक होने की बात मुंह से निकालना भी मुश्किल हो जाएगा। जैसे ही कोई बोला, उसकी देशभक्ति पर सवाल उठ जाएगा कि कमबख्त देश की सेना पर आरोप लगाकर उसका मनोबल कमजोर करना चाहता है।
भूसा उठाएंगे
यही क्यों, यह भी देखिए कि यूपी में योगी जी के उपयोगी नेतृत्व वाली सरकार की देखरेख में बरेली के शिक्षकों को भूसा उठाने के काम में लगा दिया गया। आखिर देशभर में बच्चों के दिमाग में भरना हो तो भूसा तो उठाना ही होगा और शिक्षकों से बेहतर ढंग से यह काम और कौन कर सकता है। वही तो समझेंगे कि उठाए गए भूसे में से किस बच्चे के मगज में कब और कितनी मात्रा डालना है भूसे की, ताकि पीएम मोदी से बेहतर कोई और उसे कभी दिखे ही नहीं।

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