-एआई डीपफेक का नया डर
-डीपफेक तकनीक के जरिए किसी व्यक्ति का चेहरा, आवाज या शरीर डिजिटल रूप से बदलकर ऐसा दृश्य बनाया जा सकता है। यही वजह है कि रश्मिका मंदाना, आलिया भट्ट, दीपिका पादुकोण जैसी कई अभिनेत्रियां पहले भी ऐसी फर्जी सामग्री के निशाने पर आ चुकी हैं।
कन्नड़ अभिनेत्री और कांतारा चैप्टर १ से चर्चित रुक्मिणी वसंत एआई डीपफेक का शिकार बनी हैं। सोशल मीडिया पर उनके नाम से कुछ बिकिनी तस्वीरें और वीडियो प्रसारित किए गए, जिन्हें अभिनेत्री ने पूरी तरह ‘फर्जी और गढ़ा हुआ’ बताया है। उन्होंने इसे निजता का गंभीर उल्लंघन बताते हुए साइबर अपराध पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है और कानूनी कार्रवाई शुरू करने की बात कही है।
यह मामला केवल एक अभिनेत्री की छवि खराब करने तक सीमित नहीं है। यह बताता है कि एआई तकनीक अब मनोरंजन या सुविधा का साधन भर नहीं रही, बल्कि किसी की पहचान, चेहरा और प्रतिष्ठा को चुराकर डिजिटल उत्पीड़न का हथियार भी बन सकती है। रुक्मिणी वसंत ने साफ कहा है कि इस तरह की सामग्री बनाना और फैलाना अत्यंत गैर-जिम्मेदाराना कृत्य है तथा इससे लड़कियों और महिलाओं को गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
डीपफेक तकनीक के जरिए किसी व्यक्ति का चेहरा, आवाज या शरीर डिजिटल रूप से बदलकर ऐसा दृश्य बनाया जा सकता है, जो देखने में वास्तविक लगे। यही वजह है कि रश्मिका मंदाना, आलिया भट्ट, दीपिका पादुकोण जैसी कई अभिनेत्रियां पहले भी ऐसी फर्जी सामग्री के निशाने पर आ चुकी हैं।
भारत में यह मामला साइबर कानून, निजता के अधिकार और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की जवाबदेही, तीनों पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। कानून मौजूद हैं, लेकिन चुनौती यह है कि फर्जी सामग्री कितनी तेजी से हटे, दोषियों की पहचान कितनी जल्दी हो और पीड़ित को मानसिक-सामाजिक राहत कितनी प्रभावी मिले। रुक्मिणी वसंत का मामला चेतावनी है कि एआई के युग में चेहरा भी चोरी हो सकता है। अब जरूरी है कि डीपफेक बनाने वालों, पैâलाने वालों और ऐसे कंटेंंट को बढ़ावा देने वाले प्लेटफॉर्म, तीनों पर सख्त और त्वरित कार्रवाई हो।
