मनमोहन सिंह
हिंदुस्थान में हर हिंदुस्थानी सोने के प्यार में पड़ा रहता है। ऐसा हो भी क्यों नहीं, क्योंकि किसी जमाने में यहां सोने की चिड़ियों का बसेरा था! जमाना बदला तो सोने की जगह वैâश से रोमांस जागृत हो गया। जो लाजमी भी है, क्योंकि कहा जाता है ‘नो मनी लाइफ फनी-फनी’
खैर, अब आते हैं काम की बात पर… लोग अपनी गाढ़ी कमाई (और कभी-कभी बिना गाढ़ी वाली भी) को बैंक लॉकर या गद्दे के नीचे छिपाकर रखने में परम सुख का अनुभव करते हैं। लेकिन भैया, अब वो दिन गए। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने साफ कह दिया है कि अगर घर की अलमारी में रखा वैâश और सोना ‘अनडिक्लेयर्ड’ यानी अघोषित निकला, तो आपके तोते उड़ना तय है।
अब जरा टैक्स का गणित भी समझ लीजिए, जो किसी सस्पेंस मूवी की क्लाइमेक्स जैसा है। अगर आप पकड़े गए और आपने सीधे-साधे बनकर अपनी आय का स्रोत बता भी दिया, तब भी सरकार आपसे कोई ‘थैंक यू’ नहीं कहनेवाली। इस पर सीधे ६० फीसदी का मूल टैक्स लगेगा। बात यहीं खत्म नहीं होती, ऊपर से २५ फीसदी का सरचार्ज और ४ फीसदी का सेस ऐसे चिपकेगा जैसे समोसे के साथ मुफ्त की चटनी। कुल मिलाकर यह फटका ७८ फीसदी बैठता है। मतलब, अगर आपके पास १ करोड़ की अघोषित संपत्ति मिली, तो ७८ लाख रुपए सीधे सरकार के खाते में। बचे हुए २२ लाख में आप अपनी किस्मत को रो सकते हैं।
लेकिन ट्विस्ट अभी बाकी है! अगर आप यह बताने में पूरी तरह फेल रहे कि यह पैसा आया कहां से तो आयकर विभाग ‘गब्बर सिंह’ वाले मोड में आ जाता है। वो ऐसी पेनल्टी ठोकेगा कि कुल वसूली ८६ फीसदी तक पहुंच जाएगी यानी १ करोड़ में से सिर्फ १४ लाख आपके पास बचेंगे। वैसे, सरकार थोड़ी दयालु भी हुई है। ‘अपडेटेड आइटीआर’ के जरिए आपको सुधरने का एक मौका मिलता है, बशर्ते आप नोटिस मिलने से पहले खुद ही सब सच-सच उगल दें। वैसे नियम तो यह भी है कि घर में वैâश रखने की कोई लिमिट नहीं है, आप पूरा कमरा नोटों से भर लें, लेकिन शर्त बस इतनी है कि आपके पास हर एक नए-पुराने नोट की ‘जन्म कुंडली’ होनी चाहिए। वरना बाबू, गद्दे के नीचे छुपाया हुआ ‘सोना’ आपकी रातों की नींद छीनने के लिए काफी है!
