मुख्यपृष्ठनए समाचार‘अदृश्य शक्ति’ ने फोड़ी एनसीपी-शिवसेना!

‘अदृश्य शक्ति’ ने फोड़ी एनसीपी-शिवसेना!

-सुप्रिया सुले का चुनाव आयोग पर प्रहार

सामना संवाददाता / मुंबई
महाराष्ट्र की राजनीति में एनसीपी और शिवसेना के विभाजन का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है। एनसीपी सांसद सुप्रिया सुले ने चुनाव आयोग पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि महाराष्ट्र की दो प्रमुख संवैधानिक राजनीतिक पार्टियों को जिस तरह विभाजित किया गया, वह लोकतंत्र के लिए खतरनाक है। सुले ने कहा कि इन दोनों दलों को तोड़ना संविधान की भावना के अनुरूप नहीं था और इसके पीछे किसी ‘अदृश्य शक्ति’ की भूमिका रही।
-चुनाव आयोग ने नहीं दिखाई निष्पक्षता!
-सुप्रिया ने इलेक्शन कमीशन को घेरा
उनका कहना है कि महाराष्ट्र में जो हुआ, वह केवल दो दलों का विभाजन नहीं बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर चेतावनी है। यह हमला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि मामला केवल एनसीपी की आंतरिक लड़ाई तक सीमित नहीं है।
सुले का निशाना सीधे उस व्यवस्था पर है, जिसके तहत एनसीपी और शिवसेना के अलग-अलग गुटों को पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न से जुड़े अधिकार मिले। उनका तर्क है कि किसी राजनीतिक दल की पहचान केवल विधायकों की संख्या से तय नहीं होनी चाहिए। पार्टी की स्थापना, विचारधारा और संगठनात्मक विरासत को भी महत्व मिलना चाहिए। सुले ने दावा किया कि चुनाव आयोग ने शरद पवार के नेतृत्व वाले दल के साथ निष्पक्ष व्यवहार नहीं किया। महाराष्ट्र की राजनीति में यह विवाद नया नहीं है, लेकिन सुले के ताजा बयान ने इसकी राजनीतिक आग फिर भड़का दी है। शिवसेना में एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में विद्रोह के बाद पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न ‘धनुष-बाण’ को लेकर विवाद हुआ। इसी तरह एनसीपी में अजीत पवार के अलग होने के बाद शरद पवार और अजीत पवार गुट आमने-सामने आ गए। चुनाव आयोग के पैâसलों ने इन दोनों विवादों को नया राजनीतिक आयाम दिया। सुले ने सवाल उठाया कि यदि किसी पार्टी के संस्थापक और उसकी विचारधारा को किनारे कर केवल निर्वाचित प्रतिनिधियों की संख्या के आधार पर पार्टी की पहचान तय होगी तो फिर राजनीतिक दलों की संस्थागत पहचान का क्या अर्थ रह जाएगा?

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