-मनपा ने १५ एकड़ जमीन पट्टे पर दी; विपक्ष ने किया फैसले का विरोध
द्रुप्ति झा / मुंबई
मुंबई के मुलुंड डंपिंग ग्राउंड की जमीन को लेकर मनपा की सुधार समिति के फैसले ने एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। धारावी पुनर्विकास परियोजना के नाम पर मुलुंड की करीब १५ एकड़ जमीन पांच साल के लिए निजी कंपनी को पट्टे पर देने के प्रस्ताव को सुधार समिति ने मंजूरी दे दी है। अब इस फैसले का विपक्ष द्वारा विरोध किया जा रहा है।
प्रस्ताव के मुताबिक, ६०,७०३ वर्ग मीटर जमीन नवभारत मेगा डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड को दी जाएगी। यहां कास्टिंग यार्ड, प्रीकास्ट मैन्युपैâक्चरिंग यूनिट और रेडी-मिक्स कंक्रीट प्लांट लगाए जाने हैं। मनपा ने जमीन का किराया २५२ रुपए प्रति वर्ग मीटर प्रतिमाह तय किया है, जिसमें हर साल ६ प्रतिशत की बढ़ोतरी होगी।
मनपा का दावा है कि इस पट्टे से करीब १०३.४७ करोड़ रुपए की आय होगी। लेकिन सवाल यह है कि जिस जमीन को तैयार करने और सुधारने पर करोड़ों रुपए खर्च हुए, उसका इस्तेमाल निजी डेवलपर को देने से वास्तव में मुंबईकरों को कितना फायदा होगा? डेवलपर द्वारा साइट के सुधार पर करीब २०.०४ करोड़ रुपए खर्च किए जाने हैं, जिसे किराए में समायोजित किया जाएगा। इसके बाद मनपा को शुद्ध किराए के रूप में करीब ८३.४४ करोड़ रुपए मिलने की उम्मीद है। यानी करोड़ों की जमीन का सौदा एक बार फिर आंकड़ों की बाजीगरी में उलझता नजर आ रहा है।
प्रशासन की जल्दबाजी पर उठे सवाल
सबसे बड़ा सवाल जमीन की मौजूदा स्थिति को लेकर है। मनपा के मुताबिक साइट पर अभी भी जैव खनन का काम जारी है और यहां करीब २.५ से ३ लाख मीट्रिक टन कचरा मौजूद है। दावा है कि जमीन सौंपने से पहले इस कचरे को हटाया जाएगा। लेकिन सवाल उठता है कि जब जमीन पूरी तरह साफ और सुरक्षित भी नहीं हुई है तो उसके पट्टे की इतनी जल्दी क्या है।
