सामना संवाददाता / मुंबई
-बागी उम्मीदवारों ने बढ़ाई महायुति की चिंता, नासिक में समीकरण उलझे
विधान परिषद चुनाव में नामांकन वापस लेने की समयसीमा समाप्त हो चुकी है, लेकिन कुछ स्थानों पर बागी उम्मीदवारों के मैदान में डटे रहने से महायुति की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। खासकर नासिक की सीट पर सियासी घमासान तेज हो गया है, जिससे महायुति की चिंता बढ़ गई है।
नासिक विधान परिषद की सीट महायुति के सीट बंटवारे में शिवसेना (शिंदे गुट) के हिस्से आई है और यहां से नरेंद्र दराडे को महायुति का अधिकृत उम्मीदवार बनाया गया है। हालांकि, सीटों के अंतिम बंटवारे से पहले ही भाजपा की ओर से गणेश गीते ने अपना नामांकन दाखिल कर दिया था। वहीं, उनके भाई गोकुल गीते ने अपक्ष उम्मीदवार के रूप में चुनावी मैदान में उतरकर मुकाबले को और रोचक बना दिया।
पिछले दो-तीन दिनों से मंत्री गिरीश महाजन और मंत्री दादा भुसे, गीते बंधुओं को मनाने और नामांकन वापस लेने के लिए लगातार प्रयास कर रहे थे। नामांकन वापसी के अंतिम दिन गणेश गीते ने अपना नामांकन वापस ले लिया, लेकिन गोकुल गीते के मैदान में बने रहने से महायुति की परेशानी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है।
नासिक की यह सीट महायुति के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न बन चुकी है। ऐसे में बागी उम्मीदवारों की मौजूदगी चुनावी गणित बिगाड़ सकती है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि मतदान के दिन यह राजनीतिक समीकरण किस करवट बैठता है और महायुति अपनी प्रतिष्ठा बचाने में सफल होती है या नहीं।
बागी का दांव, महायुति की धड़कन तेज!
नासिक विधान परिषद सीट पर गोकुल गीते के चुनाव मैदान में बने रहने से महायुति के वोटों में सेंध लगने की आशंका जताई जा रही है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि यदि बागी उम्मीदवार को पर्याप्त समर्थन मिला, तो महायुति को इस प्रतिष्ठित सीट पर अप्रत्याशित झटका लग सकता है।
