जब यूनाइटेड नेशन बन गया मच्छी बाजार!
मनमोहन सिंह
कहते हैं डिप्लोमेसी यानी कूटनीति वो कला है जहां आप किसी को ‘नरक में जाओ’ भी इस शालीनता से कहते हैं कि सामने वाला रास्ते की पूछताछ करने लगे। लेकिन पिछले शुक्रवार संयुक्त राष्ट्र (यूएन) के मुख्यालय में जो हुआ, उसे देखकर कूटनीति ने खुद अपना सिर पकड़ लिया होगा। हुआ यूं कि संघर्ष में यौन हिंसा उन्मूलन के अंतर्राष्ट्रीय दिवस पर बैठक चल रही थी, लेकिन कूटनीतिक मर्यादाओं का ऐसा ‘उन्मूलन’ हुआ कि यूएन का हॉल देखते ही देखते स्थानीय ‘मच्छी बाजार’ में तब्दील हो गया।
‘चुप हो जाइए… मैं माननीय सदस्य हूं!’
मामला तब गरमाया जब इजरायल के राजदूत डैनी डैनन मंच पर आए। हाल ही में संयुक्त राष्ट्र ने बच्चों के खिलाफ दुर्व्यवहार के मामलों को लेकर इजरायल को अपनी ब्लैकलिस्ट में डाल दिया था। अब इजरायल को यह ‘सम्मान’ पचाना मुश्किल हो रहा था। डैनन साहब ने सीधे संयुक्त राष्ट्र महासचिव की विशेष प्रतिनिधि प्रमिला पैटन के इस्तीफे की मांग कर डाली और आरोप लगाया कि वे बॉस एंटोनियो गुटेरेस के ‘इजरायल-विरोधी’ एजेंडे के आगे घुटने टेक चुकी हैं।
तभी बच्चों और सशस्त्र संघर्ष मामलों की प्रतिनिधि वैनेसा फ्रेजियर ने ‘पॉइंट ऑफ ऑर्डर’ उठाकर डैनन को व्यक्तिगत टिप्पणी न करने की नसीहत दी। बस फिर क्या था? डैनन कूटनीति भूलकर पूरी तरह ‘लोकल फाइट’ के मूड में आ गए। उन्होंने चिल्लाते हुए कहा, ‘हम एक सदस्य देश हैं और आप यूएन की कर्मचारी! अब आप चुप हो जाइए… आपकी रिपोर्ट शर्मनाक है!’ कुल मिलाकर माहौल ऐसा था कि बस ‘तू जानता नहीं मेरा बाप कौन है’ बोलना बाकी रह गया था।
इजरायल के ‘पुराने तेवर’ नियम हमारे लिए नहीं!
वैसे, इजरायल का यह आक्रामक और बेबाक रवैया कोई नया नहीं है। यूएन के मंच पर अपने से असहमत होने वालों को कायदे-कानून सिखाना इजरायल के पुराने तेवरों का हिस्सा रहा है। चाहे इतिहास में सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों को रद्दी का टुकड़ा समझना हो या वैश्विक मंचों पर वीटो की ढाल लेकर खड़े रहना, इजरायल ने हमेशा यह साफ किया है कि उसकी सुरक्षा और नीतियां वैश्विक कूटनीति की मोहताज नहीं हैं।
पिछले महीने जब यह रिपोर्ट आई थी, तब इजरायल ने इसे यूएन का ‘एक और निचला स्तर’ बताया था। बात यहीं नहीं रुकी, इजरायली विदेश मंत्रालय ने तो महासचिव गुटेरेस से सारे संबंध तोड़ने तक की धमकी दे डाली। यह अलग बात है कि गुटेरेस साहब इस साल अपना १० साल का कार्यकाल पूरा कर वैसे भी घर जाने वाले हैं, लेकिन इजरायल जाते-जाते भी उन्हें कड़े तेवर दिखाने का कोई मौका नहीं छोड़ रहा।
कूटनीति का नया अध्याय
वैनेसा फ्रेजियर की रिपोर्ट ने चेतावनी दी है कि फिलिस्तीनी बच्चों के खिलाफ बढ़ते उल्लंघनों के कारण इजरायली सेटलर्स को भी वैश्विक ब्लैकलिस्ट में डाला जा सकता है। वैसे इस लिस्ट में हमास भी शामिल है, लेकिन इजरायल को इस ‘बराबरी’ से सख्त एतराज है।
तस्वीर साफ है, एक तरफ दुनिया के सबसे बड़े मंच पर वैश्विक शांति और नियमों की दुहाई दी जा रही थी और दूसरी तरफ ‘चुप हो जाओ’ के नारों से कूटनीति का सरेआम तमाशा बन रहा था। वाकई, जब बात अपनी मर्जी चलाने की हो, तो दुनिया के सबसे रसूखदार लोकतंत्र भी ‘मच्छी बाजार’ के सामने फेल हो जाते हैं!
