मनमोहन सिंह
भारत, जो कल तक आबादी के विस्फोट से डर रहा था, आज एक नई खामोश चुनौती के मुहाने पर है। देश की प्रजनन दर गिरकर १.९ पर आ चुकी है, जो आबादी का संतुलन बनाए रखने वाले रिप्लेसमेंट लेवल २.१ से काफी नीचे है। कभी १९७१ में यह दर ५.२ थी, जो अब सिमट कर रह गई है। हम चीन को पीछे छोड़ दुनिया के सबसे अधिक आबादी वाले देश तो बन चुके हैं, लेकिन हमारा भविष्य अब धीरे-धीरे बूढ़ा होने की ओर बढ़ रहा है।
दो भारत, राज्यों का विरोधाभास
देश में एक तरफ बिहार जैसे राज्य हैं जहां प्रजनन दर सबसे अधिक २.९ है, वहीं दूसरी तरफ दिल्ली में यह १.२, केरल और तमिलनाडु में १.३, तथा आंध्र प्रदेश में १.४ है, जहां आबादी तेजी से सिकुड़ रही है। ग्रामीण इलाकों में जहां यह दर २.१ है, वहीं शहरों में स्थिति और गंभीर है, जहां यह आंकड़ा महज १.५ रह गया है।
पालने खाली होने की पांच बड़ी वजहें
पढ़ाई और बच्चों के पालन-पोषण का खर्च आम आदमी के बजट से बाहर हो चुका है।
कामकाजी महिलाएं अब करियर और आर्थिक आत्मनिर्भरता को प्राथमिकता दे रही हैं, जिससे शादियां देर से हो रही हैं।
स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार से शिशु मृत्यु दर प्रति हजार ३० से घटकर २४ हो गई है, जिससे लोग अब जयादा बच्चे पैदा नहीं करते।
संयुक्त परिवारों के टूटने से कामकाजी माता-पिता के लिए अकेले बच्चों की देखभाल करना एक बड़ी सिरदर्दी बन गई है।
शिक्षा और साक्षरता के प्रसार से लोग परिवार नियोजन और गर्भनिरोधक उपायों को बेहतर ढंग से अपना रहे हैं।
डेमोग्राफिक डिविडेंड पर मंडराता खतरा
भारत वर्तमान में उस दौर में है जहां युवाओं की आबादी सबसे अधिक है और यह सिलसिला साल २०५५ तक चलने की उम्मीद है। लेकिन चीन और जापान की तरह पूरी तरह विकसित होने से पहले ही भारत में बुजुर्गों की संख्या बढ़ने का खतरा मंडरा रहा है। द लांसेट रिपोर्ट के अनुसार, साल २०४८ तक भारत की आबादी १.६ अरब के अधिकतम स्तर को छूकर साल २१०० तक वापस घटकर केवल १ अरब के आसपास रह जाएगी।
आगे की राह, क्या कर रही हैं सरकारें
केंद्र सरकार की ओर से फिलहाल कोई राष्ट्रीय नीति नहीं आई है, लेकिन राज्य सरकारें अपने स्तर पर मोर्चा संभाल रही हैं। आंध्र प्रदेश सरकार तीसरा बच्चा होने पर तीस हजार और चौथा होने पर चालीस हजार रुपए की प्रोत्साहन राशि दे रही है। इसके अलावा आंध्र, तेलंगाना और गोवा जैसे राज्यों ने मुफ्त सरकारी आईवीएफ सेंटर भी खोले हैं।
निष्कर्ष यही है कि यदि भारत को विकसित होने से पहले बूढ़ा होने से बचना है, तो दुनिया के अन्य देशों की तरह समय रहते बुजुर्गों के लिए सामाजिक सुरक्षा और युवाओं को परिवार बढ़ाने के लिए वित्तीय मदद देने वाली एक ठोस राष्ट्रीय नीति बनानी होगी।
