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रेल की रफ्तार पर दौड़ रहा ‘नशे का कारोबार’!

-करोड़ों की ड्रग्स लाखों का गुटखा बरामद

-‘ऑपरेशन सतर्क’ और ‘ऑपरेशन नार्कोस’ के बावजूद नहीं थम रही तस्करी

जेदवी / मुंबई

मुंबई की लाइफलाइन कही जाने वाली रेलवे अब केवल यात्रियों की नहीं, बल्कि नशे और प्रतिबंधित तंबाकू उत्पादों की तस्करी का भी सबसे आसान गलियारा बनती जा रही है। करोड़ों रुपए की ड्रग्स, लाखों रुपए का गुटखा और लगातार हो रही गिरफ्तारियों के बावजूद तस्करों के हौसले पस्त होने का नाम नहीं ले रहे हैं। सवाल यह है कि जब एक के बाद एक बड़ी खेप रेलवे स्टेशनों और ट्रेनों से बरामद हो रही है, तब आखिर यह जहर मुंबई तक पहुंच वैâसे रहा है? क्या तस्करों का नेटवर्क सुरक्षा एजेंसियों से एक कदम आगे चल रहा है?
इसी कड़ी में २९ जुलाई को वेस्टर्न रेलवे की विजिलेंस टीम ने बोरीवली स्टेशन पर बांद्रा टर्मिनस-अजमेर सुपरफास्ट एक्सप्रेस के एस-२ कोच में छापा मारकर पांच बैगों से १,०४० पैकेट, यानी करीब ३२० किलोग्राम प्रतिबंधित गुटखा और पान मसाला बरामद किया। बरामद माल की कीमत करीब १.७० लाख रुपये आंकी गई है। इस मामले में २६ वर्षीय अनिल शंकर नागदा को गिरफ्तार कर जीआरपी के हवाले किया गया, जहां उसके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता और खाद्य सुरक्षा कानून के तहत मामला दर्ज किया गया।
यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले वसई रोड स्टेशन पर संयुक्त कार्रवाई में ३.२५ लाख रुपए से अधिक कीमत का १,७७१ पैकेट प्रतिबंधित गुटखा जब्त किया गया था। वहीं जनवरी में ‘ऑपरेशन सतर्क’ के दौरान भी लाखों रुपये का गुटखा बरामद कर पांच तस्करों को गिरफ्तार किया गया था।
अगर सात महीनों के आंकड़ों पर नजर डालें तो तस्वीर और भी भयावह नजर आती है। मई में अगस्त क्रांति एक्सप्रेस से ६.३० करोड़ रुपए मूल्य की मेथम्फेटामाइन पकड़ी गई, जबकि जून में दिल्ली-मुंबई राजधानी एक्सप्रेस से दो किलोग्राम उच्च गुणवत्ता वाली कोकीन बरामद हुई, जिसकी अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कीमत करोड़ों रुपए बताई गई। सेंट्रल रेलवे ने भी जनवरी से अप्रैल के बीच ४३.६७ लाख रुपए का गुटखा, गांजा और अन्य अवैध सामान जब्त किया। उपलब्ध मामलों के आधार पर सात महीनों में कम से कम ६.८२ करोड़ रुपए से अधिक का अवैध माल पकड़ में आया है, जबकि कोकीन की कीमत इसमें शामिल नहीं है।
रेलवे प्रशासन ‘ऑपरेशन सतर्क’ और ‘ऑपरेशन नार्कोस’ चलाने का दावा कर रहा है, महाराष्ट्र सरकार गुटखा सिंडिकेट पर मकोका के तहत कार्रवाई की बात कर रही है, लेकिन लगातार हो रही बरामदगी एक असहज सवाल खड़ा करती है। जब इतनी बड़ी मात्रा में जहर लगातार ट्रेनों से पकड़ा जा रहा है, तो आखिर कितनी खेप ऐसी होगी जो बिना किसी रोक-टोक के अपने ठिकाने तक पहुंच रही है? जब तक तस्करी के पूरे नेटवर्क की कमर नहीं तोड़ी जाती, तब तक रेलवे के रास्ते ‘नशे का सफर’ रुकता दिखाई नहीं देता।
ऑपरेशन के बाद भी बेखौफ हैं तस्कर
रेलवे का ‘ऑपरेशन सतर्क’ और ‘ऑपरेशन नार्कोस’, जबकि महाराष्ट्र सरकार का मकोका अभियान भी तस्करों की कमर नहीं तोड़ पाया। लगातार हो रही बरामदगी बता रही है कि ट्रेनों के जरिए नशे और प्रतिबंधित गुटखे की तस्करी का नेटवर्क अब भी पूरी तरह सक्रिय है।

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