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संपादकीय: मरणोत्तर दोषमुक्ति

कोयला खदान आवंटन घोटाले के मामले में दिवंगत पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह को सुप्रीम कोर्ट ने ‘क्लीन चिट’ दे दी है। अदालत का यह फैसला मनमोहन सिंह पर लगे ‘अस्तित्वहीन’ एकमात्र दाग को धो डालता है। अब सवाल यह उठता है कि क्या इसके लिए अदालत का आभार व्यक्त किया जाए या यह सवाल पूछा जाए कि यह फैसला डॉ. सिंह के जीवनकाल में क्यों नहीं आया? डॉ. सिंह पर लगा एक राजनीतिक छींटा मरणोपरांत ही सही, धुल गया, इस बात पर संतोष व्यक्त किया जाए या इस बात का दुख जताया जाए कि डॉ. सिंह को जीते जी यह संतोष नहीं मिल सका? डॉ. सिंह और तत्कालीन यूपीए सरकार पर आरोपों की धूल उड़ाकर अपना राजनीतिक स्वार्थ साधनेवाली आज की सत्ताधारी पार्टी का नकाब उतर गया इसलिए खुशी मनाई जाए या फैसला समय पर न आने के कारण इन लोगों को राजनीतिक फायदा उठाने का मौका मिला, इसलिए नाराजगी जाहिर की जाए? दादा के मुकदमे का फैसला पोते के जमाने में आना हमारे यहां एक आम बात है, लेकिन इस
बेशर्मी का खमियाजा
डॉ. मनमोहन सिंह जैसे व्यक्ति को भी क्यों भुगतना पड़े? यह मामला ओडिशा की तालबीरा-२ कोयला खदान के आवंटन से जुड़ा था। २०१५ में विशेष अदालत ने डॉ. मनमोहन सिंह समेत कुछ लोगों को इस संबंध में समन जारी किया था। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने इस पर स्टे वगैरह दे दिया। लेकिन मामला ‘न्यायाधीन’ ही बना रहा। अब डॉ. मनमोहन सिंह के निधन के डेढ़ साल बाद सुप्रीम कोर्ट ने डॉ. सिंह के खिलाफ सभी आरोपों को खारिज कर दिया और इस मामले को पूरी तरह से बंद कर दिया। उन्हें ‘क्लीन चिट’ दे दी। यह सब तो ठीक है, लेकिन इस फैसले में हुई भारी देरी का समर्थन कैसे किया जा सकता है? डॉ. सिंह पर दो दशक पहले राजनीतिक आरोप लगाए जाते हैं और उनसे उनकी ‘दोषमुक्ति’ उनके निधन के डेढ़ साल बाद होती है। यह हमारी राजनीतिक और न्यायिक व्यवस्था की बेहयाई का आईना है। इस आईने में प्रधानमंत्री मोदी और न्यायपालिका दोनों को खुद को देखना चाहिए। देश के हुक्मरानों और न्याय व्यवस्था के चिराग तले का अंधेरा पिछले दस-बारह सालों में और भी गहरा हो गया है। डॉ. मनमोहन सिंह को आज मिली ‘दोषमुक्ति’ दस सालों से इसी
अंधेरे में खुद को खोज
रही थी। आज इस अंधेरे को सुप्रीम कोर्ट ने दूर कर दिया है। फिर भी, डॉ. मनमोहन सिंह जैसे सज्जन, ईमानदार और देश की अर्थव्यवस्था को नई जिंदगी देनेवाले प्रधानमंत्री को कटघरे में खड़ा करनेवाले प्रधानमंत्री मोदी और उनकी पार्टी का क्या? क्या प्रधानमंत्री मोदी अब यह स्वीकार करेंगे कि उन्होंने डॉ. सिंह पर झूठे और राजनीतिक आरोप लगाए थे? इसके लिए वे देश से न सही, क्या कम से कम डॉ. सिंह की आत्मा से माफी मांगेंगे? डॉ. मनमोहन सिंह हर मायने में ‘मिस्टर क्लीन’ थे। इसे साबित करने के लिए उन्हें किसी अदालत के ‘दोषमुक्ति’ प्रमाण पत्र की जरूरत नहीं है। इसके बावजूद, कोयला खदान आवंटन मामले में ऐसे चरित्रवान नेता के हिस्से में जीवनकाल में दोष और मरणोपरांत दोषमुक्ति आए, यह देश का दुर्भाग्य है! यह व्यवस्था की निर्लज्जता की पराकाष्ठा है। अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए मोदी ने एक बेदाग राजनीतिक चरित्र पर दाग लगाने का पाप किया। मिस्टर मोदी, इस पाप का प्रायश्चित कीजिए। यही एकमात्र रास्ता है।

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