-सीजेपी संस्थापक अभिजीत दीपके का सनसनीखेज आरोप; कहा विडियो मिला कि
-दीपके के माता-पिता का दावा-धमकी के बाद
-दो सप्ताह तक घर छोड़कर रिश्तेदारों के यहां रहे
सामना संवाददाता / छत्रपति संभाजीनगर
प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों और पेपर लीक के खिलाफ देशभर में युवा आंदोलन का चेहरा बने कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने अब राजनीतिक दबाव और धमकी को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। दीपके और उनके परिवार का दावा है कि उन्हें बीजेपी में शामिल होने के लिए कहा गया और ऐसा नहीं करने पर उनके माता-पिता को नुकसान पहुंचाने की धमकी दी गई।
अभिजीत के पिता भगवानराव दीपके के मुताबिक, उनके बेटे को भेजे गए एक वीडियो संदेश में कहा गया था, ‘बीजेपी में शामिल हो जाओ। हमें पता है कि तुम्हारे माता-पिता कहां रहते हैं।’ परिवार का दावा है कि इस संदेश के बाद वे इतने भयभीत हो गए थे कि शुरुआती दिनों में अपना घर छोड़कर कोकण क्षेत्र में रिश्तेदारों के यहां रहने चले गए। करीब दो सप्ताह बाद वे वापस छत्रपति संभाजीनगर लौटे।
‘छात्रों को डराया तो सरकार बदल देंगे’ -पेज २
दीपके ने दावा किया कि उन्हें केवल धमकी ही नहीं दी गई, बल्कि आंदोलन और सोशल मीडिया गतिविधियां बंद करने के बदले पैसे देने तथा बीजेपी में आने का प्रस्ताव भी दिया गया था। पुरानी रिपोर्टों के मुताबिक, धमकी मिलने के बाद उनके आवास पर पुलिस सुरक्षा बढ़ाई गई थी।
‘छात्रों को डराया तो सरकार बदल देंगे’
दीपके ने खड़े किए कई सवाल
अभिजीत दीपके ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि आंदोलन में शामिल छात्रों के खिलाफ मुकदमे, गिरफ्तारी या प्रताड़ना जारी रही तो इसका राजनीतिक परिणाम भुगतना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि छात्र केवल सरकार से सवाल पूछना ही नहीं जानते, जरूरत पड़ने पर सरकार बदलने की ताकत भी रखते हैं। दीपके के आरोपों ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर उन्हें धमकी देने वाला व्यक्ति कौन था? कथित वीडियो संदेश की पुलिस या साइबर एजेंसियों ने क्या जांच की? धमकी देने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई या नहीं? यदि परिवार को वास्तविक खतरा था और पुलिस सुरक्षा दी गई, तो मामले की तह तक पहुंचने के लिए अब तक क्या कार्रवाई हुई? हालांकि उपलब्ध समाचार रिपोर्टों में इन ताजा आरोपों पर बीजेपी की ओर से कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि भी अभी नहीं हुई है। ऐसे में निष्पक्ष जांच और कथित धमकी के वीडियो की फोरेंसिक पड़ताल ही यह स्पष्ट कर सकती है कि युवा आंदोलन के इस प्रमुख चेहरे को वास्तव में राजनीतिक दल में शामिल होने के लिए डराया जा रहा था या नहीं।
