मुख्यपृष्ठनए समाचारविधायी दल और मूल राजनीतिक दल अलग-अलग इकाइयां हैं

विधायी दल और मूल राजनीतिक दल अलग-अलग इकाइयां हैं

-कपिल सिब्बल का जोरदार तर्क
सामना संवाददाता / नई दिल्ली
शिवसेना के नाम और चुनाव चिह्न से जुड़े मामले तथा गद्दार विधायकों की अयोग्यता के मामले में आखिरकार गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में अंतिम सुनवाई शुरू हो गई। शिवसेना की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने जोरदार दलील देते हुए कहा कि विधायक दल और मूल राजनीतिक दल दो अलग-अलग इकाइयां हैं। १०, १३ या १५ सदस्यों का कोई विधायक दल एक राजनीतिक दल से दूसरे राजनीतिक दल में नहीं जा सकता। आजकल ऐसा बार-बार हो रहा है। यह प्रतिनिधि लोकतंत्र पर बड़ा आघात है।
कपिल सिब्बल ने अदालत का ध्यान इस तथ्य की ओर भी आकर्षित किया कि वर्ष १९६६ में शिवसेनाप्रमुख बालासाहेब ठाकरे द्वारा स्थापित शिवसेना के उद्धव ठाकरे ही वर्ष २०१३ से आधिकारिक रूप से पक्षप्रमुख हैं। वर्ष २०१८ में एकनाथ शिंदे की विधायक दल के नेता के रूप में नियुक्ति स्वयं उद्धव ठाकरे ने की थी। अदालत ने कपिल सिब्बल की दलीलों को गंभीरता से लेते हुए मामले की अगली सुनवाई ४ अगस्त को निर्धारित की है। अदालत ने सिब्बल की दलीलों को गंभीरता से लेते हुए दोनों पक्षों को मामले से संबंधित सभी दस्तावेजों का संकलन प्रस्तुत करने का निर्देश भी दिया।
मूल शिवसेना से गद्दारी करने वाले शिंदे गुट को पार्टी का नाम और ‘धनुष-बाण’ चुनाव चिह्न देने के केंद्रीय चुनाव आयोग के पैâसले को शिवसेनापक्षप्रमुख उद्धव ठाकरे ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। इसके अलावा, गद्दार शिंदे गुट के विधायकों को अयोग्य घोषित नहीं करने के विधानसभा अध्यक्ष के पैâसले के खिलाफ पार्टी के मुख्य सचेतक और विधायक सुनील प्रभु ने भी अलग याचिका दायर की है। पिछले कई महीनों से इन याचिकाओं पर लगातार सुनवाई की तारीखें मिल रही थीं। आखिरकार, गुरुवार को भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ के समक्ष इन मामलों की सुनवाई शुरू हुई। सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने जोरदार दलीलें पेश करते हुए केंद्रीय चुनाव आयोग और विधानसभा अध्यक्ष के पैâसले पर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि वर्ष २०१३ से उद्धव ठाकरे ही शिवसेना के आधिकारिक पक्षप्रमुख हैं। उन्होंने अदालत को बताया कि वर्ष २०१८ में हुए पार्टी के आंतरिक चुनावों से संबंधित सभी दस्तावेज और प्रमाण न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए जा चुके हैं।

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