अनिल मिश्र / पटना
अपने देश और खासकर बिहार की धरती पर प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। समय-समय पर ऐसी प्रतिभाएं सामने आती रहती हैं, जो अपनी असाधारण क्षमता से प्रदेश और देश का नाम रोशन करती हैं। इसी कड़ी में बिहार के गया जिले के टिकारी अनुमंडल क्षेत्र के उतरैन गांव की रहने वाली महज दो साल दस माह की वाणी कांत ने अपनी अद्भुत स्मरण शक्ति से इतिहास रच दिया है।
नन्हीं वाणी पलक झपकते ही 195 देशों के झंडों को पहचानकर उनके नाम बता देती है। इतना ही नहीं, वह किसी भी विषय से जुड़े सवालों का जवाब भी आसानी से दे देती है। उसकी इस प्रतिभा को देखते हुए उसका नाम इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में दर्ज किया गया है। अब परिवार उसे वर्ल्ड रिकॉर्ड में शामिल कराने की तैयारी कर रहा है।
गया जिला मुख्यालय से करीब 21 किलोमीटर दूर स्थित कोंच प्रखंड के उतरैन गांव निवासी वाणी कांत की इस असाधारण प्रतिभा से हर कोई हैरान है। जिस उम्र में बच्चे रंगों की पहचान करना और ठीक से बोलना सीखते हैं, उसी उम्र में वाणी ने 45 एशियाई देशों के राष्ट्रीय ध्वजों की पहचान कर उनके नाम महज 3 मिनट 32 सेकेंड में बताकर इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में अपना नाम दर्ज कराया है। इस उपलब्धि के लिए उसे ‘आईबीआर अचीवर’ की प्रतिष्ठित उपाधि से सम्मानित किया गया है।
वाणी के पिता रविकांत पाण्डेय बजाज फाइनेंस में कार्यरत हैं। उन्होंने बताया कि जब वाणी ढाई साल की थी, तब खेल-खेल में उसने एक पोस्टर पर बने 20 देशों के झंडे देखकर उनके नाम बता दिए थे। उसकी याददाश्त देखकर परिवार के लोग भी हैरान रह गए। उन्होंने बताया कि वाणी को शुरू से ही रंगों से काफी लगाव था और अब वह 150 से अधिक देशों के झंडों को देखकर उनके नाम बता देती है।
रविकांत पाण्डेय ने बताया कि वाणी ने बोलना थोड़ा देर से शुरू किया था। शुरुआत में लगा कि उसे बोलने के लिए अधिक मेहनत करानी पड़ेगी। इसके बाद उन्होंने घर पर अभ्यास के लिए किताबें मंगाईं। सबसे पहले सामान्य ज्ञान और एबीसीडी की किताब मंगाई गई। उसमें रंगों से जुड़ी एक किताब भी थी, जिसमें 20 अलग-अलग रंगों की जानकारी थी। रंगों वाली किताब याद करने के बाद वाणी घर में लगे फूलों को देखकर उनके रंग बताने लगी।
इसके बाद पिता ने सोचा कि क्यों न दुनिया के सभी देशों के झंडों की जानकारी उसे दी जाए। परिवार ने अलग-अलग देशों के झंडों के चित्र मंगवाए और वाणी ने उन्हें याद करना शुरू कर दिया। वह एक दिन में 10 से 15 झंडे याद कर लेती थी और अगले दिन खुद नए झंडे दिखाने के लिए कहती थी।
वाणी की इस विलक्षण प्रतिभा को देखते हुए अब परिवार उसे प्रतिष्ठित गिनीज बुक ऑफ रिकॉर्ड में शामिल कराने की तैयारी कर रहा है। रविकांत पाण्डेय ने बताया कि गिनीज बुक ऑफ रिकॉर्ड में नाम दर्ज कराने के लिए एक प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। उन्होंने बताया कि जानकारी लेने पर पता चला कि गिनीज बुक से पहले एशियाई रिकॉर्ड और इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में नाम दर्ज कराना जरूरी है। अब वाणी का नाम इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में दर्ज हो चुका है।
उन्होंने बताया कि वर्ल्ड रिकॉर्ड के लिए वाणी को 195 देशों के झंडों की पहचान करनी होगी। खास बात यह है कि अभी वाणी ठीक से अपना नाम भी नहीं बोल पाती, लेकिन देशों के नाम और उनके झंडों की पहचान आसानी से कर लेती है।
वाणी के दादाजी और पैथोलॉजी चिकित्सक रहे राम गोविंद पाण्डेय ने बताया कि वाणी ने 127 देशों के नाम 6 मिनट 35 सेकेंड में बताए हैं। वहीं इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड के लिए दूसरा वीडियो सेशन भी भेजा गया है।
