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१७ पदक जीतकर भी १०वें नंबर पर खिसका भारत, जमैका-न्यूजीलैंड भी निकले आगे

कॉमनवेल्थ गेम्स में सिल्वर की भरमार, लेकिन गोल्ड की कमी ने बिगाड़ा भारत का पदक गणित
ग्लासगो। कॉमनवेल्थ गेम्स २०२६ में भारतीय खिलाड़ियों ने अब तक १७ पदक जीत लिए हैं, लेकिन इसके बावजूद भारत पदक तालिका में खिसककर १०वें स्थान पर पहुंच गया है। भारत के खाते में फिलहाल ३ स्वर्ण, १० रजत और ४ कांस्य पदक हैं। आठवें दिन भारोत्तोलक लवप्रीत सिंह ने रजत और डिस्कस थ्रो खिलाड़ी सीमा कालीरमना ने कांस्य पदक जीता, लेकिन स्वर्ण पदक नहीं आने के कारण भारत की रैंकिंग में सुधार नहीं हो सका। दरअसल, कॉमनवेल्थ गेम्स की पदक तालिका कुल पदकों के आधार पर नहीं, बल्कि सबसे पहले स्वर्ण पदकों की संख्या के आधार पर तय होती है। स्वर्ण बराबर होने पर रजत और उसके बाद कांस्य पदकों को देखा जाता है। यही कारण है कि भारत के पास १७ पदक होने के बावजूद कम कुल पदक जीतने वाले कुछ देश उससे ऊपर बने हुए हैं। भारत के लिए सबसे बड़ी चिंता यह है कि उसके १७ पदकों में १० रजत हैं। कई स्पर्धाओं में भारतीय खिलाड़ी स्वर्ण पदक के बेहद करीब पहुंचे, लेकिन अंतिम मुकाबले या निर्णायक प्रयास में पिछड़ गए। लवप्रीत सिंह ने पुरुषों के ११० किलोग्राम से अधिक भार वर्ग में कुल ३८८ किलोग्राम वजन उठाकर दो राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाए, लेकिन न्यूजीलैंड के डेविड लिटी से केवल एक किलोग्राम पीछे रहकर उन्हें रजत से संतोष करना पड़ा। महिला डिस्कस थ्रो में सीमा कालीरमना ने चार फाउल के बावजूद ५८.६५ मीटर के सर्वश्रेष्ठ थ्रो के साथ कांस्य पदक जीता। इस स्पर्धा का स्वर्ण जमैका की सामंथा हॉल ने ६१.६६ मीटर के थ्रो के साथ अपने नाम किया। भारत के १७ में से आठ पदक एथलेटिक्स और पैरा एथलेटिक्स से आए हैं, जबकि आठ पदक भारोत्तोलन ने दिलाए हैं। एक पदक पैरा पावरलिफ्टिंग में मिला है। लेकिन जिन खेलों में भारत पारंपरिक रूप से मजबूत रहा है, वहां सीमित स्पर्धाएं और स्वर्ण पदकों की कम संख्या तालिका में भारी पड़ रही है। हालांकि भारत के पास अभी वापसी का अवसर मौजूद है। भाला फेंक में नीरज चोपड़ा, रोहित यादव और यशवीर सिंह फाइनल में पहुंच चुके हैं। तेजस्विन शंकर भी डेकाथलॉन में पदक की दौड़ में बने हुए हैं। आने वाली स्पर्धाओं में दो-तीन स्वर्ण पदक भारत को तालिका में तेजी से ऊपर पहुंचा सकते हैं। फिलहाल तस्वीर साफ है-पदक खूब आए हैं, लेकिन राष्ट्रमंडल खेलों की रैंकिंग में संख्या से अधिक रंग मायने रखता है। भारत की झोली में रजत पदकों की चमक तो है, मगर स्वर्ण की कमी ने उसे जमैका और न्यूजीलैंड जैसे देशों से भी पीछे धकेल दिया है।

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