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छह साल से मौत का नोटिस लिए खड़ी थी इमारत…फिर भी खाली नहीं करा सका प्रशासन

-भिवंडी में १० जिंदगियां मलबे में दफन…मरम्मत के नाम पर जर्जर ढांचे से छेड़छाड़ ने बुलाया हादसा

सामना संवाददाता / भिवंडी

शहर के बालाजी नगर इलाके में कोहिनूर नामक चार मंजिला इमारत का मलबा केवल दस लोगों की जिंदगी लेकर नहीं गिरा, बल्कि उसके साथ महानगरपालिका की नोटिसबाजी, प्रशासन की निष्क्रियता और महाराष्ट्र सरकार की जर्जर इमारत नीति के दावे भी भरभराकर ढह गए। गुरुवार, ३० जुलाई की रात गिरी इस इमारत से शुक्रवार शाम तक दस शव निकाले जा चुके थे और तीन लोग घायल हुए। सबसे बड़ा खुलासा यह है कि भिवंडी-निजामपुर महानगरपालिका ने इस इमारत को सितंबर २०२० में ही खतरनाक घोषित कर दिया था। यानी मौत ने अचानक दस्तक नहीं दी, वह छह वर्षों से सरकारी फाइलों में दर्ज चेतावनी के साथ यहां खड़ी थी।
प्रशासन के अनुसार, इमारत रहने योग्य नहीं थी और उसकी हालत मरम्मत से भी आगे निकल चुकी थी। इसके बावजूद उसे न पूरी तरह खाली कराया गया, न तोड़ा गया और न ही उसके आसपास सुरक्षा घेरा बनाया गया। हादसे के समय इमारत में मरम्मत का काम चलने की बात सामने आई है। अब ठेकेदार और मालिक की भूमिका की जांच की जा रही है। प्रश्न यह है कि जिस ढांचे को प्रशासन स्वयं ‘बियॉन्ड रिपेयर’ मान रहा था, उसमें मरम्मत की अनुमति किसने दी? काम की निगरानी किस इंजीनियर ने की और कमजोर दीवारों या भार वहन करने वाले हिस्सों से छेड़छाड़ की जांच क्यों नहीं हुई?
नोटिस दिया, जिम्मेदारी खत्म, यही है हादसों की असली जड़
नगर निकाय आमतौर पर खतरनाक इमारत पर नोटिस चिपकाकर मकान मालिक और निवासियों से उसे खाली करने को कहते हैं। नोटिस जारी होते ही अधिकारी कागजों में अपनी जिम्मेदारी पूरी मान लेते हैं। लेकिन जमीन पर न बिजली-पानी काटा जाता है, न पुलिस की सहायता से निष्कासन होता है और न समयबद्ध विध्वंस। परिणाम यह होता है कि लोग वर्षों तक मौत की छत के नीचे रहते हैं और अधिकारी हर मानसून नई सूची जारी करते रहते हैं।
खतरे का एमएमआर मानचित्र
 मुंबई: १२,००० से अधिक इमारतें तकनीकी रूप से असुरक्षित; लगभग चार लाख लोगों के रहने का अनुमान
 म्हाडा क्षेत्र: ८२ अत्यंत खतरनाक सेस्ड इमारतें; २,७३६ निवासी
 नई मुंबई: ५०० से अधिक खतरनाक इमारतें
 कल्याण-डोंबिवली: २२५ अत्यंत खतरनाक इमारतें
 वसई-विरार: ७४ सी-१ इमारतों को तत्काल खाली करने का आदेश
 भिवंडी सहित अन्य नगर निगम: पूर्ण और एकीकृत ताजा आंकड़ा सार्वजनिक नहीं
एमएमआर में हजारों इमारतों पर खतरा, लेकिन एक संयुक्त सूची तक नहीं
मुंबई महानगर क्षेत्र में मुंबई, ठाणे, भिवंडी-निजामपुर, कल्याण-डोंबिवली, नई मुंबई, मीरा-भार्इंदर, वसई-विरार, पनवेल और उल्हासनगर सहित नौ नगर निगम आते हैं। इसके बावजूद पूरे श्श्R की खतरनाक इमारतों का एकीकृत, सार्वजनिक और वास्तविक समय में अपडेट होने वाला डेटाबेस उपलब्ध नहीं है। हर नगर निकाय अलग श्रेणी, अलग सर्वे और अलग वर्ष के आंकड़े जारी करता है। इस बिखराव के कारण पूरे क्षेत्र की सटीक संख्या बताना कठिन है, लेकिन उपलब्ध आंकड़े संकट की गंभीरता दिखाते हैं। मुंबई में हाई कोर्ट की एक समिति के समक्ष मई २०२६ में बताया गया कि १२,००० से अधिक इमारतें तकनीकी रूप से असुरक्षित हैं और लगभग चार लाख लोग ऐसे ढांचों में रह रहे हैं। समिति ने इसे लगभग ‘चमत्कार’ बताया कि अब तक कोई बहुत बड़ी सामूहिक त्रासदी नहीं हुई। इसी वर्ष म्हाडा ने दक्षिण और मध्य मुंबई की ८२ सेस्ड इमारतों को मानसून से पहले अत्यंत खतरनाक सूची में रखा, जिनमें २,७३६ लोग रह रहे थे।
कल्याण-डोंबिवली महानगरपालिका ने मई २०२६ में २२५ इमारतों को ‘अत्यंत खतरनाक’ घोषित किया। नई मुंबई में ५०० से अधिक इमारतें असुरक्षित श्रेणी में चिन्हित की गर्इं और सोसायटियों को खाली करने तथा संरचनात्मक ऑडिट कराने के नोटिस दिए गए। वसई-विरार में मानसून के बीच ७४ सी-१ श्रेणी की इमारतों को तत्काल खाली कराने का आदेश जारी हुआ।
इन उपलब्ध आंकड़ों को जोड़ने पर केवल मुंबई, नवी मुंबई, कल्याण-डोंबिवली और वसई-विरार में ही करीब १२,८०० से अधिक असुरक्षित या अत्यंत खतरनाक ढांचे सामने आते हैं। लेकिन यह पूर्ण आंकड़ा नहीं है, क्योंकि भिवंडी, ठाणे, मीरा-भायंदर, उल्हासनगर और पनवेल की समकालीन सूचियां इसमें पूरी तरह शामिल नहीं हैं। वास्तविक खतरा इससे कहीं बड़ा हो सकता है।

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