-युवाओं ने कहा, सवाल पूछना गंदगी नहीं, लोकतंत्र है
-बेरोजगारी, पेपर लीक और महंगी शिक्षा पर बोलना अपराध कब से हो गया?
सामना संवाददाता / मुंबई
भाजपा सांसद और अभिनेत्री कंगना रनौत द्वारा आंदोलनकारी युवाओं को कथित रूप से ‘जेनरेशन गटर’ कहे जाने के बाद मुंबई के जेन-जी में जबरदस्त आक्रोश है। छात्रों ने आरोप लगाया है कि बेरोजगारी, शिक्षा व्यवस्था, पेपर लीक और बढ़ती महंगाई जैसे मुद्दों पर आवाज उठाने वालों को बदनाम करने के लिए पूरी पीढ़ी को अपमानित किया जा रहा है।
कंगना ने सोशल मीडिया पोस्ट में सीजेपी आंदोलन से जुड़े कुछ युवाओं की भाषा और व्यवहार पर निशाना साधते हुए उन्हें पढ़ाई में कमजोर, भ्रष्ट और गैर-जिम्मेदार तक बताया था। उन्होंने विशेष रूप से प्रदर्शन में शामिल युवा महिलाओं पर भी कटाक्ष किया। इन टिप्पणियों को लेकर सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया हुई और युवाओं ने इसे असहमति की आवाज दबाने वाला बयान बताया।
मुंबई के प्रदर्शनकारियों का कहना है कि किसी आंदोलन में कुछ लोगों की आपत्तिजनक भाषा के आधार पर लाखों युवाओं को ‘गटर’ कहना न केवल अनुचित, बल्कि एक निर्वाचित सांसद के पद की गरिमा के भी खिलाफ है। युवाओं ने सवाल किया कि जब परीक्षाएं लीक होती हैं, भर्ती वर्षों तक अटकती है और पढ़ाई पर लाखों रुपए खर्च करने के बाद भी नौकरी नहीं मिलती, तो क्या सरकार से जवाब मांगना नागरिक अधिकार नहीं है? गायक विशाल ददलानी और अभिनेता सोनू सूद समेत कई लोगों ने भी कंगना की टिप्पणी की आलोचना की है।
राजनीतिक सुर्खियों के लिए स्टंट
सीजेपी प्रवक्ता सौरव दास और कंगना के बीच भी इस मुद्दे पर तीखी जुबानी जंग हुई। दास ने आरोप लगाया कि कंगना युवा आंदोलन की लोकप्रियता का इस्तेमाल राजनीतिक सुर्खियां बटोरने के लिए कर रही हैं। जवाब में कंगना ने उन्हें ‘बेकार’ बताते हुए अपने राष्ट्रीय पुरस्कारों का उल्लेख किया।
