-जेन-जी आंदोलन का असर गांवों के स्कूलों तक
-गया में बच्चों ने खोला
-स्कूल की बदहाली का मोर्चा
छोटे बच्चों का यह कदम सवाल खड़े करता है कि जब बुनियादी सुविधाओं के लिए भी छात्रों को कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ें, तो सरकारी स्कूलों की जमीनी हकीकत क्या है।
गया के टिकारी प्रखंड स्थित सिमुआरा मध्य विद्यालय के बच्चों ने अपनी बुनियादी जरूरतों के लिए ऐसा कदम उठाया कि प्रशासन को हरकत में आना पड़ा। स्कूल की खराब व्यवस्था से परेशान ४० से अधिक छात्र-छात्राएं हाथों में आवेदन लेकर सीधे एसडीएम कार्यालय पहुंच गए और अपनी समस्याएं सामने रखीं। बच्चों की शिकायत थी कि स्कूल में कई महीनों से पंखे खराब पड़े हैं, पीने के पानी की व्यवस्था ठीक नहीं है, मध्याह्न भोजन की गुणवत्ता खराब है और कई बेंच-डेस्क टूटे हुए हैं। छात्रों ने आरोप लगाया कि कई बार शिकायत के बावजूद उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ, जिसके बाद उन्हें प्रशासन के पास जाना पड़ा।
बच्चों के अचानक एसडीएम कार्यालय पहुंचने से अधिकारियों में हलचल मच गई। छात्रों ने एसडीएम से सीधे मुलाकात की मांग की। मामले की गंभीरता देखते हुए एसडीएम ने जांच समिति गठित कर चार दिनों में रिपोर्ट देने का निर्देश दिया। इसके बाद जिलाधिकारी के निर्देश पर शिक्षा विभाग की टीम ने स्कूल का औचक निरीक्षण किया। अधिकारियों ने छात्रों से बातचीत कर पढ़ाई, पेयजल, शौचालय, बिजली और मध्याह्न भोजन की स्थिति की जानकारी ली।
देश की जेन-जी अब जाग चुकी है
युवाओं के सवालों से घिरी भाजपा की राजनीति!
भाजपा नेता की बेटी ने नए शिक्षा मंत्री को बताया `भद्दा मजाक’
देश की नई पीढ़ी यानी जेन-जी अब राजनीति को सिर्फ नारों और छवियों के आधार पर नहीं देखना चाहती। सोशल मीडिया, तेज सूचना प्रवाह और अलग-अलग स्रोतों से मिलने वाली जानकारियों के दौर में युवा अब सरकारों से सीधे सवाल पूछ रहे हैं। यही बदलाव भारतीय राजनीति में नई बहस को जन्म दे रहा है। दरअसल, हाल ही में यूपी के पूर्व भाजपा विधायक विक्रम सिंह की बेटी यशस्विनी राजे सिंह ने नीट विवाद पर केंद्र सरकार की आलोचना की है और सीजेपी के प्रदर्शन का समर्थन किया है। यशस्विनी ने शिक्षा मंत्री के तौर पर प्रह्लाद जोशी को `भद्दा मजाक’ बताया है। उन्होंने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर कहा, `त्यागपत्र में पछतावा जैसी कोई चीज नहीं दिखी।’
