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विभाजन की विभीषिका को देशवासियों के सामूहिक स्मृति में हमेशा अंकित रहने की आवश्यकता है-प्रो. विनु पंत, इतिहास विभाग, सिक्किम विश्वविद्यालय

 अनिल मिश्र / पटना

दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय (सीयूएसबी) के ऐतिहासिक अध्ययन और पुरातत्व विभाग द्वारा ‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ के उपलक्ष्य में एक विशेष व्याख्यान का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। कुलपति प्रो. कामेश्वर नाथ सिंह के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य युवा पीढ़ी को भारत के विभाजन के दौरान किए गए संघर्षों, बलिदानों और ऐतिहासिक वास्तविकताओं से अवगत कराना था। मुख्य वक्ता के रूप में सिक्किम विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग की प्रो. वीनू पंत ने अपने व्याख्यान में अत्यंत मार्मिक और विचारोत्तेजक व्याख्यान में प्रो. पंत ने 1947 के विभाजन के दौरान हुए बड़े पैमाने पर विस्थापन और गहरी मानवीय पीड़ा का जीवंत चित्रण किया। उन्होंने केवल ऐतिहासिक आंकड़ों तक सीमित न रहकर, वास्तविक घटनाओं और व्यक्तिगत आत्मकथनों के माध्यम से विभाजन के गहरे मानवीय पहलू को श्रोताओं के सामने रखा। प्रो. पंत ने कहा की विभाजन की विभीषिका और आघात को वर्तमान और भावी पीढ़ियों की सामूहिक स्मृति में अंकित रहना चाहिए। यह स्मरण ऐतिहासिक शिकायतों को पालने के लिए नहीं, बल्कि सामाजिक विभाजन की वास्तविक और विनाशकारी कीमत को पूरी तरह से समझने के लिए आवश्यक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि विभाजन एक राजनीतिक निर्णय था, जिस पर अब अंतहीन बहस करने के बजाय हमारा ध्यान ऐसे रचनात्मक उपायों पर होना चाहिए जो देश में एकता, राष्ट्रवाद और अखंडता की भावना को सुदृढ़ करें। इस संबंध में दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय (सीयूएसबी) जन सम्पर्क पदाधिकारी (पीआरओ) ने बताया कि इस अवसर पर सामाजिक विज्ञान एवं नीति विद्यापीठ के डीन प्रो. अनिल कुमार सिंह झा और ऐतिहासिक अध्ययन एवं पुरातत्व विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. प्रीति अनिल खंडारे ने भी अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने अधिक एकजुट भविष्य के निर्माण के लिए अतीत की त्रासदियों को स्वीकार करने के महत्व पर प्रकाश डाला। इससे पूर्व, कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ. आनंद गुप्ता के स्वागत भाषण और परिचयात्मक वक्तव्य से हुआ। इस अवसर पर डॉ. सुधांशु कुमार झा, डॉ. रोहित कुमार और डॉ. अनिल कुमार सहित विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के कई प्रतिष्ठित संकाय सदस्य भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का विधिवत समापन डॉ. नीरज कुमार सिंह द्वारा दिए गए धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। व्याख्यान के पश्चात एक संवादात्मक प्रश्न-उत्तर सत्र का आयोजन किया गया, जिसमें छात्रों ने विभाजन की सामाजिक-राजनीतिक गतिशीलता से जुड़े कई प्रासंगिक प्रश्न पूछे।

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