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प्रयागराज सावधान!..छतनाग में रिकॉर्ड तोड़ बारिश

राजेश सरकार / प्रयागराज

संगम नगरी प्रयागराज पर इस समय आसमानी आफत और नदियों के उफान का दोहरा संकट मंडरा रहा है। बीते 24 घंटों से हो रही मूसलाधार बारिश ने शहर से लेकर देहात तक हाहाकार मचा दिया है। मौसम विभाग और सचेत ऐप ने अगले 3 घंटों के लिए प्रयागराज समेत आस-पास के जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी किया है, जिसका साफ मतलब है कि गरज-चमक के साथ अभी और तीखी और तीव्र बारिश होने वाली है। प्रशासन भले ही ऑल इज वेल का राग अलाप रहा हो, लेकिन जमीनी हकीकत डराने वाली है।
तेजी से बढ़ रहा जलस्तर, खतरे के निशान की ओर नदियां
प्रयागराज में खतरे का निशान 84.734 मीटर है। मंगलवार शाम साढे चार बजे सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, नदियां इस निशान की तरफ तेजी से कदम बढ़ा रही हैं।
यमुना नदी (नैनी) का जलस्तर 79.34 मीटर तक पहुंच चुका है। पिछले 24 घंटों में इसमें 51 सेंटीमीटर का तगड़ा उछाल आया है। यहां रिकॉर्ड 98.4 मिमी बारिश दर्ज की गई है। गंगा नदी (फाफामऊ) का जलस्तर 80.05 मीटर पर है, जिसमें 48 सेंटीमीटर की बढ़ोतरी हुई है। यहां 96.8 मिमी बारिश हुई है। गंगा नदी (छतनाग) में सबसे खतरनाक स्थिति यहां है, जहां जलस्तर 59 सेंटीमीटर बढ़कर 78.88 मीटर हो गया है। इस इलाके में रिकॉर्ड तोड़ 115.0 मिमी बारिश दर्ज की गई है।
सरकारी दावा : बांध सुरक्षित, पर जनता में खौफ
सरकारी बुलेटिन के मुताबिक शहर के सभी बांध अभी सुरक्षित हैं। लेकिन जिस रफ्तार से नदियां हर घंटे सेंटीमीटर दर सेंटीमीटर फूल रही हैं, उसे देखकर तटीय इलाकों और निचले हिस्सों में रहने वाले लोगों की सांसें अटकी हुई हैं। अगर बारिश का यही दौर जारी रहा, तो बांधों की परीक्षा होनी तय है।
आस-पास के जिलों में भी अलर्ट की घंटी
प्रयागराज के साथ-साथ कौशांबी, प्रतापगढ़, फतेहपुर, लखनऊ, कानपुर और अयोध्या समेत कई जिलों में प्रकृति का प्रकोप जारी है। प्रशासन को कागजी दावों से निकलकर तुरंत धरातल पर मुस्तैद होना होगा, क्योंकि गंगा-यमुना का बढ़ता पानी किसी भी वक्त रिहायशी इलाकों में हाहाकार मचा सकता है।
प्रयागराज में कैसे हैं हालात?
प्रयागराज से 25 किलोमीटर दूर गारापुर-झूंसी मार्ग पर करीब 2 किलोमीटर लंबा संपर्क मार्ग पूरी तरह डूब चुका है. बदरा, सोनौटी, ढोलबजवा और पुरवा गांवों का शहर से सम्पर्क टूट चुका है। यहां पर वाहन नहीं, नावें चल रही हैं। लोग नावों से साइकिल और बाइक पार करा रहे हैं। बारिश और बाढ़ की वजह से बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं। बिजली बंद है और लोग वाहन पर नहीं नाव पर आवागमन कर रहे हैं। नावों से साइकिल और बाइक पार करा रहे हैं। लोगों को बुनियादी सुविधाओं की व्यवस्था के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। बाढ़ में फंसे गांवों में प्रशासन ने करीब दो दर्जन नौकाएं तैनात की है। ग्रामीणों ने बताया अगर घर में किसी की तबीयत खराब होती है तो उसे नाव से सड़क पार करनी होती है फिर किसी अन्य साधन से डॉक्टर के पास जाना पड़ रहा है। दूध, राशन, दवा सब कुछ नाव से लाना पड़ रहा है। प्रयागराज इस समय भयावह जल संकट से जूझ रहा है। नदियों का बढ़ता जलस्तर न सिर्फ शहर के जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर रहा है। बल्कि धार्मिक, पारिवारिक और सामाजिक गतिविधियां भी बुरी तरह बाधित हो गई हैं। बाढ़ की वजह से संगम नगरी के सभी घाट डूबे हैं। शहर के घनी आबादी वाले करेली इलाके में कई मोहल्ले नदियों में बढ़ते जलस्तर के चलते जलमग्न हो चुके हैं। इन मोहल्ले में नौकाएं भी चलने लगी है।

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