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बाकी बिलों का पहाड़, अब ‘नो पे, नो सर्विस’!

-सह्याद्रि-नंदगिरी में सरकार के अपने विभाग कटघरे में
-बकाया चुकाओ, तभी मिलेगी अगली बुकिंग

सामना संवाददाता / मुंबई

मुंबई में सरकार के अपने विभागों की वित्तीय कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। राज्य के महत्वपूर्ण ‘सह्याद्रि’ और ‘नंदगिरी’ अतिथिगृहों में आयोजित बैठकों के दौरान ली गई खानपान सेवाओं, हॉल, कक्ष और अन्य सुविधाओं के बिल लंबे समय से बकाया बताए जा रहे हैं। हालात यहां तक पहुंच गए कि राजशिष्टाचार विभाग को सख्त चेतावनी जारी करनी पड़ी—बकाया चुकाओ, वरना ‘नो पे, नो सर्विस’!
सरकार के इन महत्वपूर्ण अतिथिगृहों में मंत्रिमंडल से लेकर विभिन्न सरकारी विभागों की बैठकें और अन्य उच्चस्तरीय कार्यक्रम आयोजित होते हैं। बैठकों के दौरान खानपान से लेकर हॉल, कक्ष और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। लेकिन सवाल यह है कि जब सरकारी विभागों ने इन सेवाओं का इस्तेमाल किया तो उनके बिलों का भुगतान समय पर क्यों नहीं किया गया?
राजशिष्टाचार विभाग ने अब स्पष्ट कर दिया है कि बकाया राशि जमा नहीं करने वाले विभागों और कार्यालयों को भविष्य में सह्याद्रि और नंदगिरी में बैठक या कक्ष की बुकिंग नहीं दी जाएगी। इतना ही नहीं, किसी बैठक के आयोजन से पहले कम से कम २५ फीसदी राशि अग्रिम जमा करना अनिवार्य किया गया है। यानी अब सरकारी विभागों के लिए भी साफ संदेश है, पहले भुगतान, फिर सरकारी अतिथिगृह की सुविधा!
सरकार के विभागों पर वित्तीय अनुशासन का सवाल
यह मामला सिर्फ बकाया बिलों तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकारी वित्तीय अनुशासन और जवाबदेही से भी जुड़ा है। आम नागरिक का बिजली, पानी या अन्य सरकारी शुल्क बकाया होने पर नोटिस और कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू हो जाती है। लेकिन जब सरकार के अपने विभाग सेवाएं लेने के बाद भुगतान लंबित रखते हैं तो जवाबदेही किसकी होगी? रिपोर्ट के अनुसार, बढ़ते बकाये के कारण राजशिष्टाचार विभाग पर आर्थिक दबाव बढ़ रहा है। महालेखापाल की ओर से भी लंबित देयकों को लेकर आपत्ति जताए जाने की बात सामने आई है। ऐसे में अब बकाया राशि की वसूली और संबंधित विभागों की जवाबदेही तय करने की जरूरत और बढ़ गई है। सरकार जनता से समय पर बिल भरने और वित्तीय अनुशासन का पालन करने की अपेक्षा करती है। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या सरकारी विभाग भी उसी अनुशासन का पालन कर रहे हैं?

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