-सुप्रीम कोर्ट और राजस्थान हाई कोर्ट के आदेशों के बावजूद चिकित्सा सुविधा नहीं मिलने का दावा
सामना संवाददाता / मुंबई
जोधपुर सेंट्रल जेल में बंद ८७ वर्षीय संत आशाराम को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग उठाई गई है। मुंबई की संस्था ‘युवा जागृति संघ’ ने आरोप लगाया है कि गंभीर बीमारियों से जूझ रहे संत आशाराम को न्यायालय के पूर्व निर्देशों के बावजूद पर्याप्त आयुर्वेदिक उपचार उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है। संस्था ने मांग की है कि उन्हें तत्काल किसी आयुर्वेदिक अस्पताल में भर्ती कराकर समुचित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए। संस्था के अनुसार, संत आशाराम एडवांस कोरोनरी आर्टरी डिजीज, बार-बार होने वाले एंजाइना, अनियमित हृदयगति, एट्रियल फिब्रिलेशन, इंटरस्टिशियल एंजियोडिस्प्लेसिया और ट्राइजेमिनल न्यूराल्जिया जैसी गंभीर बीमारियों से पीड़ित हैं। संस्था का कहना है कि उनकी उम्र और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को देखते हुए जेल में उपलब्ध सीमित चिकित्सा सुविधाएं पर्याप्त नहीं हैं। युवा जागृति संघ ने बताया कि ३० जून २०२६ को सुप्रीम कोर्ट और १ जुलाई २०२६ को राजस्थान हाई कोर्ट ने पहले से उपलब्ध कराई जा रही आयुर्वेदिक चिकित्सा सुविधाएं जारी रखने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद उन्हें अपेक्षित उपचार नहीं मिलना न्यायालय के आदेशों की अवहेलना है। संस्था के मुताबिक, चिकित्सक डॉ. सचित भाटी ने ३० अक्टूबर को जेल अधीक्षक को पत्र लिखकर उपचार की व्यवस्था करने की मांग की थी। वहीं, २८ अक्टूबर को एक अन्य चिकित्सक डॉ. अरुण त्यागी ने भी उन्हें आयुर्वेदिक अस्पताल में भर्ती कराने की सलाह दी थी। श्री योग वेदांत सेवा समिति, कोटा की ओर से भी जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर न्यायालय के निर्देशों का पालन करते हुए संत आशाराम को तत्काल आयुर्वेदिक अस्पताल में भर्ती कराने की मांग की गई है।
